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5 Bowlers Who Takes More Wickets Than Runs: टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस खेल में कई बार ऐसे फैक्ट्स निकलकर सामने आते हैं, जो हैरान कर देते हैं। क्या आप यकीन करेंगे कि दुनिया में कुछ ऐसे क्रिकेटर भी हैं, जिन्होंने अपने करियर में रन बनाने से ज्यादा विकेट हासिल किए हैं। देखा जाए तो इन खिलाड़ियों के लिए रन बनाना विकेट झटकने से ज्यादा मुश्किल साबित हुआ। आज हम आपको ऐसे ही क्रिकेटरों के बारे में बताएंगे। इंटरेस्टिंग बात यह है कि इस लिस्ट में दो भारतीय खिलाड़ी भी शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्पिनर जैक सॉन्डर्स को विक्टर सॉन्डर्स के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 1902 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। बाएं हाथ के स्पिनर जैक उन परिस्थितियों में बल्लेबाजों के लिए सबसे कठिन गेंदबाज थे, जो उनकी गेंदबाजी के अनुकूल थीं। उन्होंने अपने छह साल के करियर के दौरान केवल 14 टेस्ट मैच खेले, जहां उन्होंने 79 विकेट लिए और सिर्फ 39 रन बनाए।
भारत के लेफ्ट आर्म स्पिनर ने नवंबर 2009 में श्रीलंका के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। ओझा घरेलू सरजमीं पर देश के बेस्ट स्पिनर्स में से एक रहे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, खासकर घरेलू मैचों में। 24 टेस्ट मैचों में ओझा ने 113 विकेट झटके। हालांकि उनके बल्ले से इतने मैचों में सिर्फ 89 रन निकले।
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ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ब्रूस रीड को 1985 में एडिलेड में भारत के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला। टेस्ट क्रिकेट में उनका पीक टाइम तब आया, जब उन्होंने 1990 में मेलबर्न में इंग्लैंड के खिलाफ 13 विकेट झटक लिए थे। उन्होंने इसी मैदान पर एक साल बाद भारत के खिलाफ भी 12 विकेट हासिल किए। रीड ने 27 टेस्ट मैचों में 24.64 की औसत से 113 विकेट झटके, लेकिन जब बात बल्ले से रन बनाने की आती है तो उनके बल्ले से सिर्फ 93 रन ही निकले।
2000 के दशक में न्यूजीलैंड के प्रमुख गेंदबाज रह क्रिस मार्टिन इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने देश के लिए 70 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 233 विकेट झटके। मार्टिन टेस्ट क्रिकेट में सटीक लाइन और लैंथ के लिए भी जाने जाते हैं। हालांकि बल्लेबाजी में उनका हाल बेहाल रहा। उन्होंने अपने करियर की 104 पारियों में केवल 123 रन बनाए, जिसके परिणामस्वरूप उनके विकेट और रनों के बीच 110 का अंतर था, जो विकेट लेने की कला के प्रति उनके समर्पण को उजागर करता है।
भारत के बेस्ट स्पिनर्स में से एक रहे भागवत चंद्रशेखर 1960 और 1970 के दशक के दौरान भारत की स्पिन चौकड़ी के सदस्य थे। इसमें उनके अलावा इरापल्ली प्रसन्ना, एस वेंकटराघवन और बिशन सिंह बेदी शामिल थे। भारतीय स्पिन चौकड़ी ने उस दौरान कुछ ऐतिहासिक टेस्ट जीत में अहम योगदान दिया। चन्द्रशेखर गेंद के साथ अपने अविश्वसनीय योगदान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने शानदार टेस्ट करियर के दौरान 58 मैचों में 29.74 की औसत से 242 विकेट लेकर पिच पर अपना जादू चलाया। हालांकि उन्होंने बल्ले से 58 मैचों में सिर्फ 167 रन बनाए।
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