Why Krishna Gave Gita Gyan To Arjun: श्रीमद्भगवद्गीता, अर्जुन को श्रीकृष्ण द्वारा दिया हुआ दिव्य ज्ञान है, जो जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालता है. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि श्री कृष्ण ने पांडवों में से अर्जुन को ही क्यों गीता का ज्ञान दिया था? अर्जुन के बड़े भाई युधिष्ठिर तो धर्मराज थे, फिर भी श्री कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के मैदान में गीता का उपदेश देने के लिए क्यों चुना? आज हम आपको 3 पॉइंट्स में समझाएंगे कि क्यों श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देना उपयुक्त समझा.
इसलिए श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था गीता का उपदेश
अर्जुन कर्मयोगी और धर्मशील होने के साथ-साथ स्वभाव से जिज्ञासु भी थे. उन्हें धार्मिक ग्रंथों में लिखी बातों पर विश्वास था, लेकिन वो हर परिस्थिति का शांत मन से आकलन कर खुद फैसला लेते थे. जबकि उनके अन्य 4 भाई युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव आंख बंद करके शास्त्रों में लिखी बातों का पालन करते थे.
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अर्जुन के कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी थी. अर्जुन को सूर्य देव और देवी कुंती के पुत्र व अपने सबसे बड़े भाई कर्ण का वध करना था. इसके आलावा अर्जुन को ही भीष्म पितामह का सामना करना था, जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. इन दोनों महापुरुषों का वध करना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी बड़ी चुनौती थी.
अर्जुन में सभी नरों की तुलना में सबसे उत्कृष्ट (दूसरों से बेहतर) गुण थे, जिस कारण उन्हें नरोत्तम भी कहा जाता है. ये भी एक कारण है, जिसकी वजह से श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान अर्जुन को देना उस समय उपयुक्त समझा था.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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इसलिए श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था गीता का उपदेश
अर्जुन कर्मयोगी और धर्मशील होने के साथ-साथ स्वभाव से जिज्ञासु भी थे. उन्हें धार्मिक ग्रंथों में लिखी बातों पर विश्वास था, लेकिन वो हर परिस्थिति का शांत मन से आकलन कर खुद फैसला लेते थे. जबकि उनके अन्य 4 भाई युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव आंख बंद करके शास्त्रों में लिखी बातों का पालन करते थे.
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अर्जुन में सभी नरों की तुलना में सबसे उत्कृष्ट (दूसरों से बेहतर) गुण थे, जिस कारण उन्हें नरोत्तम भी कहा जाता है. ये भी एक कारण है, जिसकी वजह से श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान अर्जुन को देना उस समय उपयुक्त समझा था.
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