Vedic Ghadi Facts: भारत की प्राचीन परंपरा में समय को केवल घड़ी से जुड़ा अंक न मानकर जीवन की गति माना गया है. इसी सोच से वैदिक घड़ी की अवधारणा विकसित हुई, जो प्राचीन ज्ञान परंपरा और विज्ञान का एक अद्भुत संगम है. आपको बता दें कि वैदिक घड़ी वह समय प्रणाली है जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की वास्तविक चाल पर आधारित है. इसका प्रयोग भारतीय पंचांग, ज्योतिष और धार्मिक जीवन में सदियों से होता आ रहा है. आइए जानते हैं, ग्रेगोरियन समय से वैदिक घड़ी में क्या अंतर है और इसका महत्व और उपयोग क्या है?
दिन की शुरुआत का अलग नियम
आधुनिक ग्रेगोरियन घड़ी में दिन की शुरुआत रात को 12 बजे से मानी जाती है. इसके विपरीत वैदिक घड़ी में नया दिन सूर्योदय के साथ आरंभ होता है, क्योंकि हिन्दू संस्कृति में सूर्य के उदय को जीवन ऊर्जा का प्रारंभ माना गया है. इसी कारण वैदिक गणना में प्रत्येक दिन की समय-सारणी सूर्योदय पर निर्भर करती है, जो स्थान के अनुसार बदलती रहती है.
समय की प्राचीन इकाइयां
वैदिक पद्धति में समय को कई सूक्ष्म भागों में बांटा गया है. एक दिन यानी आज के सूर्योदय से कल सूर्योदय तक की अवधि को 30 मुहूर्त या 60 घटी में विभाजित किया जाता है. इसे एक पूर्ण दिवस कहते हैं. वहीं, एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है. इससे छोटी इकाइयों को पल और विपल कहा जाता है. यह विभाजन दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय विद्वान समय की बारीक समझ रखते थे.
1 पूर्ण दिन : 30 मुहूर्त या 60 घटी
1 मुहूर्त : 2 घटी
1 घटी : 60 पल
1 पल : 60 विपल
मोटे तौर पर कहें, आप घटी को घंटा, पल को मिनट और विपल को सेकेंड के तौर पर मान सकते हैं, लेकिन यह समान नहीं है, क्योंकि 1 घटी केवल 24 मिनट की होती है यानी एक घंटे में ढाई घटी होती है.
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ग्रेगोरियन समय और वैदिक घड़ी में अंतर
आज हम जिस घड़ी का उपयोग करते हैं वह ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ पर आधारित है. इसमें समय का विभाजन आधुनिक प्रणाली में दिन को 24 घंटों, 60 मिनट और 60 सेकंड में बांटा गया है. वैदिक घड़ी इससे कई मायनों में अलग है. वैदिक घड़ी में एक दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है. एक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है.
ग्रेगोरियन घड़ी में समय गणना का आधार इंसानों द्वारा बनाए गए कृत्रिम मानक समय (Standard Time) पर चलती है. जबकि, वैदिक घड़ी पूरी तरह से सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक खगोलीय गति पर आधारित होती है. इसलिए इसमें समय का चक्र प्रकृति और सौर मंडल की हलचल के साथ बिल्कुल सटीक बैठा होता है.
वैदिक घड़ी का महत्व और उपयोग
विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कारों में शुभ मुहूर्त तय करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. पूजा-पाठ और व्रत-त्योहारों के सही समय निर्धारण में भी यह उपयोगी है. शिक्षा और शोध के क्षेत्र में यह विद्यार्थियों को भारतीय खगोल विज्ञान की गहराई से परिचित कराती है.
वैदिक घड़ी का उपयोग
वर्तमान युग में वैदिक घड़ी डिजिटल रूप में भी उपलब्ध है. आज के समय में वैदिक घड़ी के कई व्यावहारिक उपयोग हैं:
शुभ कार्य: विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत के लिए उचित शुभ मुहूर्त निर्धारित करने में यह अत्यंत सहायक है.
धार्मिक अनुष्ठान: पूजा, व्रत और त्योहारों के सही समय का सटीक निर्धारण में उत्तम है.
स्वास्थ्य और आयुर्वेद: यह समय के अनुसार शरीर के दोष (वात, पित्त, कफ) के संतुलन को समझकर भोजन, विश्राम और दिनचर्या तय करने में उपयोगी है.
शिक्षा और शोध: खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों को यह समझाने में मदद करती है कि प्राचीन ऋषियों ने बिना आधुनिक उपकरणों के समय की सटीक गणना कैसे करते थे.
इस तरह वैदिक घड़ी यह समझ देती है कि समय केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की एक स्वाभाविक लय है. जहां ग्रेगोरियन घड़ी जीवन को तेज गति से चलने की आदत डालती है, वहीं वैदिक घड़ी हमें प्रकृति के अनुरूप जीना सिखाती है.
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