Sheetala Ashtami 2026 Today: आज चैत्र माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है इस दिन को शीतला अष्टमी के नाम से जानते हैं. उदयातिथि के आधार पर आज 11 मार्च 2026, दिन बुधवार को शीतला अष्टमी का व्रत है. आज शीतला माता की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. आज बसोड़ा पूजा जाता है. बसोड़ा पूजा में माता शीतला को एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाते हैं. भक्त विधि-विधान से शीतला माता की पूजा करते हैं तो जीवन के दुख-दर्द समाप्त होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. चलिए शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा विधि के बारे में जानते हैं.
शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi)
माता शीतला का स्वरूप हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते धारण किये हुए है. शीतला माता गर्दभ यानी गधे की सवारी किये हुए हैं. शीतला माता की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनकर तैयार हो जाएं. एक थाली में माता शीतला के लिए भोग सजाएं. ध्यान रहे सभी भोग एक दिन पहले बने हुए होने चाहिए. दूसरी थाली में आटे का बना दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी, मोली, सिक्के और मेहंदी रखें. एक लोटे में ठंडा पानी जरूर रखें.
ये भी पढ़ें - Moonga Stone: मूंगा रत्न धारण करने से बदल सकता है भाग्य, जानिए किसे, कैसे और कब करना चाहिए धारण?
शीतला अष्टमी की पूजा के लिए आटे के बने दीपक को बिना जलाए मंदिर में रख दें. शीतला माता को एक-एक कर सभी चीजें अर्पित करें और भोग लगाएं. घर के सभी सदस्यों और खुद को हल्दी का टीका लगाएं. माता को जल अर्पित करें और मेहंदी, मोली और वस्त्र अर्पित करें. थोड़ा जल बचाकर रखें और घर के सदस्यों की आंखों पर लगाएं. थोड़ा और जल लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाकर अर्पित करें और पूजा सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें.
शीतला अष्टमी भोग (Sheetala Ashtami Bhog)
शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला को ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है. आपने शीतला सप्तमी के दिन जो पुआ, रोटी, बाजरा, मीठे चावल, नमक पारे और मठरी बनाकर रखे हैं उन चीजों का माता शीतला को भोग लगाएं. इस विधि से पूजा करने और माता को भोग लगाने से आपको शीतला माता का आशीर्वाद मिलेगा और रोग-दोष से मुक्ति मिलेगी.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Sheetala Ashtami 2026 Today: आज चैत्र माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है इस दिन को शीतला अष्टमी के नाम से जानते हैं. उदयातिथि के आधार पर आज 11 मार्च 2026, दिन बुधवार को शीतला अष्टमी का व्रत है. आज शीतला माता की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. आज बसोड़ा पूजा जाता है. बसोड़ा पूजा में माता शीतला को एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाते हैं. भक्त विधि-विधान से शीतला माता की पूजा करते हैं तो जीवन के दुख-दर्द समाप्त होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. चलिए शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा विधि के बारे में जानते हैं.
शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi)
माता शीतला का स्वरूप हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते धारण किये हुए है. शीतला माता गर्दभ यानी गधे की सवारी किये हुए हैं. शीतला माता की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनकर तैयार हो जाएं. एक थाली में माता शीतला के लिए भोग सजाएं. ध्यान रहे सभी भोग एक दिन पहले बने हुए होने चाहिए. दूसरी थाली में आटे का बना दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी, मोली, सिक्के और मेहंदी रखें. एक लोटे में ठंडा पानी जरूर रखें.
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शीतला अष्टमी की पूजा के लिए आटे के बने दीपक को बिना जलाए मंदिर में रख दें. शीतला माता को एक-एक कर सभी चीजें अर्पित करें और भोग लगाएं. घर के सभी सदस्यों और खुद को हल्दी का टीका लगाएं. माता को जल अर्पित करें और मेहंदी, मोली और वस्त्र अर्पित करें. थोड़ा जल बचाकर रखें और घर के सदस्यों की आंखों पर लगाएं. थोड़ा और जल लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाकर अर्पित करें और पूजा सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें.
शीतला अष्टमी भोग (Sheetala Ashtami Bhog)
शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला को ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है. आपने शीतला सप्तमी के दिन जो पुआ, रोटी, बाजरा, मीठे चावल, नमक पारे और मठरी बनाकर रखे हैं उन चीजों का माता शीतला को भोग लगाएं. इस विधि से पूजा करने और माता को भोग लगाने से आपको शीतला माता का आशीर्वाद मिलेगा और रोग-दोष से मुक्ति मिलेगी.
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