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कौन हैं भगवान शिव की पुत्रियां? जानिए इनकी पौराणिक कथाएं!

भगवान शिव के बेटे कार्तिकेय और भगवान गणेश का नाम आपने काफी सुना होगा, लेकिन अधिकतर लोग भगवान शिव की बेटियों से अनजान हैं तो आइए जानते हैं कि भोलनाथ की ये पुत्रियां कौन हैं।

Author Edited By : Mohit Updated: Mar 22, 2025 19:44
lord shiva faimly
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देवों के देव महादेव के एक पुत्र कार्तिकेय हैं। वहीं, भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती के उबटन से हुआ था। इसी प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती की बेटियां भी हैं। इनका जिक्र कुछ पुराणों में भी देखने को मिलता है। हालांकि ये भोलेनाथ और माता पार्वती की वास्तिवक पुत्रियां नहीं हैं।

भगवान शिव की पुत्रियों के जन्म की अलग-अलग कहानियां हैं, कुछ की कहानी तो सिर्फ लोककथाओं में ही मिलती है। वहीं, कुछ की कहानी आपको कुछ पौराणिक ग्रंथों में मिल जाती है।

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माता पार्वती ने मांगी थी पुत्री

पद्म पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती अपने अकेलेपन से काफी अधिक परेशान हो गई थीं। इस कारण उन्होंने कल्पवृक्ष से एक पुत्री मांगी थी। उस वृक्ष से एक बच्ची निकली। जिसे माता पार्वती का शोक हरने वाली मतलब अशोक सुंदरी रखा गया। माना जाता है जिस स्थान से शिवलिंग का जल प्रवाहित होता है, वह स्थान अशोक सुंदरी का माना जाता है। माना जाता है कि इनका विवाह राजा नहुष से हुआ था, जो आगे चलकर इंद्र के पद पर आसीन हुए।

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मनसा हैं भगवान शिव की मानस पुत्री

देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण में मनसा देवी का उल्लेख मिलता है। इनका उल्लेख महाभारत काल में भी नागों की देवी के रूप में किया गया है। लोकमान्यताओं के अनुसार, ये भगवान शिव की मानस पुत्री हैं। इनका जन्म महर्षि कश्यप और कद्रू से हुआ था। ये नागलोक की देवी हैं और नागों का कल्याण करती हैं। भगवान शिव ने उन्हें सिद्धियां प्रदान की थीं और उन्हें देवी का स्थान दिया था।

तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है तीसरी बेटी का जिक्र

कुछ तांत्रिक ग्रंथों में भगवान शिव की तीसरी बेटी ज्योति का भी जिक्र आया है। ये शिव और पार्वती की ऊर्जा से प्रकट हुई थीं। इन्हें प्रकाश और चेतना का प्रतीक माना गया है। इनको सूर्य की आत्मशक्ति भी कहा गया है। इनकी उपासना तमिलनाडु, असम और बंगाल व नेपाल में ज्यादा की जाती है। इनको ही शिव की मानस पुत्री कहा गया।

लोक कथाओं में मिलता है इनका जिक्र

कुछ लोककथाओं में भगवान शिव की पांच नागकन्याओं जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि का भी जिक्र मिलता है, लेकिन किसी खास पुराण या ग्रंथ में ऐसी जानकारी नहीं है। मान्यता है कि माता पार्वती और शिव जलक्रीड़ा कर रहे थे तभी वे स्खलित हो गए तो माता ने स्खलित वीर्य को पत्ते पर रख दिया, जिससे पांच नाग कन्याओं का जन्म हुआ। माना जाता है कि सावन माह के शुक्ल पत्र की पंचमी को शिव की इन बेटियों पांच नागकन्याओं का पूजन करने से सांप काटने का खतरा नहीं रहता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Edited By

Mohit

First published on: Mar 22, 2025 07:44 PM

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