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Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी व्रत करने से होगा पापों का नाश, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी का व्रत 01 दिसंबर 2025 को है. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास होता है. मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती का पर्व भी मनाया जाता है. आप यहां मोक्षदा एकादशी व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जान सकते हैं.

Author Written By: Aman Maheshwari Updated: Nov 30, 2025 12:45
Mokshada Ekadashi 2025
Photo Credit- News24GFX

Mokshada Ekadashi 2025: 01 दिसंबर 2025, दिन सोमवार को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि है. इसे मोक्षदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है. मोक्षदा एकादशी व्रत और पूजा-अर्चना करने से भक्त को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इससे भगवान विष्णु की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है. मोक्षदा एकादशी के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में आप यहां जान सकते हैं.

मोक्षदा एकादशी शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 05:08 से 06:02 तक
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 05:35 से 06:56 तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:49 से दोपहर 12:31 तक
विजय मुहूर्त- दोपहर में 01:55 से 02:37 तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 05:21 से 05:48 तक
सायाह्न सन्ध्या- शाम में 05:24 से 06:45 तक
अमृत काल- रात में 09:05 से 10:34 तक
निशिता मुहूर्त- रात 11:43 से सुबह 12:38 तक

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मोक्षदा एकादशी पूजा विधि

मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल की सफाई कर चौकी स्थापित करें. इसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान को पीला चंदन, फूल, तुलसी दल, अक्षत, माला आदि अर्पित करें. विष्णु जी के समक्ष दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप करें और आरती करें. आरती के बाद भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.

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मोक्षदा एकादशी महत्व

मोक्षदा एकादशी को मोक्षदा इस वजह से कहा जाता है क्योंकि, इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा से पाप नष्ट होते हैं और दुख-दर्द से मुक्ति मिलती है. मोक्ष की प्राप्ति होने पर व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है. इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है.

पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जाप

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।
यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।

ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Nov 30, 2025 12:45 PM

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