चाय पीने का वादा निभाने आधी रात किसके घर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री? जानें पूरा मामला

Bageshwar Dham Pandit Dhirendra Shastri: राजस्थान के कोटा जिले की रामगंजमंडी में बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री की कथा चल रही है. कथा के दौरान दो बहनों भावना और खुशबू राठौड़ ने बाबा को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और उन्हें अपने घर आने का न्यौता दिया, जिसे कल देर रात आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने पूरा किया है.

Dhirendra Krishna Shastri

Credit- Social Media

Bageshwar Dham Pandit Dhirendra Shastri: कोटा जिले की रामगंजमंडी तहसील के गूंदी गांव में इस वक्त बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा चल रही है, जिसका आरंभ 23 जनवरी 2026 को हुआ है. बीते दिनों कथा के दौरान बाबा से वार्ड नंबर 3 रामगंजमंडी निवासी दो बहनों भावना और खुशबू राठौड़ ने अपना भाई बनने की इच्छा प्रकट की और उनकी कलाई पर राखी बांधी.

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राखी बांधने के बाद अपने भाई आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से भावना और खुशबू राठौड़ ने निवेदन किया था कि वो उनके घर चाय पीने आएं. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपनी बहनों को वचन दिया था कि वो तीन दिन यहां रामगंजमंडी में हैं. इस दौरान वो उनके घर चाय पीने जरूर आएंगे. हालांकि, शनिवार की देर रात धीरेंद्र शास्त्री ने अपना ये वादा पूरा किया और अपनी बहनों के घर चाय पीने के लिए पहुंचे.

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रात करीब 12 बजे धीरेंद्र शास्त्री पहुंचे अपनी बहनों के घर

बता दें कि आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बहनों से किया हुआ वायदा निभाया है. शनिवार को देर रात बाबा ने कोटा में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के घर पहुंचकर पहले उनके परिवार जनों से भेंट की, जिसके बाद वो अचानक अपनी बहनों खुशबू और भावना राठौड़ के घर पहुंचे. कहा जा रहा है कि रात करीब 12 बजे बाबा अपनी बहनों के घर पहुंचे.

भावना-खुशबू का नहीं है कोई सगा भाई

मीडिया से बात करते हुए भावना ने कहा ‘मुझे विश्वास था मेरे भाई मेरे घर चाय पीने जरूर आएंगे. वो अपना किया हुआ वादा जरूर पूरा करेंगे. मैंने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि वो दोनों बहनें हैं. उनका कोई भाई नहीं है, इसलिए वह उन्हें राखी बांधकर अपना भाई बनाना चाहती हैं.’

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इसी के आगे उन्होंने कहा ‘मैंने कई बार उनसे मिलने का प्रयास किया लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. जब रामगंजमंडी में कथा करने के लिए आचार्य शास्त्री पहुंचे तो हम दोनों बहनों ने ठान लिया कि वो अब अपनी इच्छा पूरी करके ही रहेंगी और हुआ भी ऐसा ही.’

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बेटियों को कई बार पिता ने समझाया

खुशबू और भावना राठौड़ के पिता लालचंद राठौड़ और माता हेमलता राठौड़ ने आचार्य जी को बताया कि ‘वो अक्सर आपसे मिलने की बातें किया करती थीं. कई बार उन्होंने अपनी बेटियों को समझाया भी कि ये संभव नहीं है. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री कभी भी उनके घर चाय पीने नहीं आएंगे.’

बागेश्वर धाम आने का दिया निमंत्रण

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने खुशबू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि ‘आज से हम तुम्हारे भाई हैं. भाई की कमी कभी महसूस मत करना.’ बता दें कि आचार्य धीरेंद्र शास्त्री अपनी बहन के घर लगभग आधा घंटा बैठे, जिस दौरान उन्होंने चाय भी पी. साथ ही उनके माता-पिता व उपस्थित अन्य परिजनों से उनका हाल-चाल पूछा.

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हालांकि, अपनी बहनों के घर से विदा लेने से पहले उन्होंने उन्हें बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बच्चियों के पिता लाल चंद्र राठौड़ को बागेश्वर धाम की तरफ से एक कूपन भी दिया.

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