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Gudi Padwa 2026: 19 या 20 मार्च, कब है गुड़ी पड़वा? जानें मराठी नववर्ष की सही तिथि और दिनभर के शुभ मुहूर्त

Gudi Padwa 2026 Date: प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है, जिस दिन से मराठी नववर्ष की शुरुआत होती है. चलिए जानते हैं साल 2026 में 19 मार्च या 20 मार्च, किस दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा. साथ ही आपको इस पावन दिन के शुभ मुहूर्त के बारे में पता चलेगा.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Mar 6, 2026 14:07
Gudi Padwa 2026
Credit- Social Media

Gudi Padwa 2026 Kab Hai: मराठी और कोंकणी हिंदुओं के लिए गुड़ी पड़वा के पर्व का खास महत्व है, जो कि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा यानी मराठी नववर्ष के पहले दिन का आरम्भ तेल-स्नान से होता है, जिस दौरान सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तिल या अन्य सुगंधित तेल की मालिश की जाती है. फिर नए कपड़े पहनकर घर के मुख्य द्वार पर ‘गुड़ी’ फहराते हैं और उसकी पूजा-आरती करते हैं. इसके बाद नीम के पत्ते और गुड़ का प्रसाद ग्रहण किया जाता है. हालांकि, शाम में पूजा करने के बाद गुड़ी को उतारकर शुद्ध जगह पर रख दिया जाता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुड़ी पड़वा के दिन घर में गुड़ी की पूजा करने से घर वालों के जीवन में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आगमन होता है. साथ ही स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है. चलिए अब जानते हैं साल 2026 में किस दिन गुड़ी पड़वा है.

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2026 में कब है गुड़ी पड़वा? (gudi padwa kab hai 2026 mein)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 19 मार्च 2026 की सुबह 6 बजकर 52 मिनट से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन अगले दिन 20 मार्च 2026 की सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में 19 मार्च 2026, वार बृहस्पतिवार को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा. साथ ही मराठी शक सम्वत 1948 का आरंभ होगा.

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19 मार्च 2026 के शुभ मुहूर्त

  • सूर्योदय- प्रात: काल 06:26
  • चन्द्रास्त- शाम 06:58
  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: काल 04:51 से प्रात: काल 05:38
  • विजय मुहूर्त- दोपहर 02:29 से दोपहर 03:18
  • अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:04 से दोपहर 12:53
  • सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:31 से शाम 07:43

उगादी के रूप में भी मनाया जाता है

बता दें कि गुड़ी पड़वा के दिन से ही हिंदू नववर्ष, विक्रम संवत और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जिसकी धूम विशेषतौर पर महाराष्ट्र और गोवा में देखने को मिलती है. हालांकि, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को उगादी के रूप में मनाया जाता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 06, 2026 02:07 PM

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