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Chaitra Purnima 2025: पूरे साल की मेहनत बेकार कर सकती है तुलसी पूजन की ये 5 भूल, बढ़ सकता धन संकट

चैत्र पूर्णिमा हिन्दू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है, जिसका विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन तुलसी माता से संबंधित एक भी त्रुटि यानी गलती नहीं होगी चाहिए। कहते हैं, इसका असर पूरे साल की आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं, क्या हैं ये गलतियां?

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हिंदू धर्म में चैत्र माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह हिन्दी साल की पहली पूर्णिमा होती है। इस बार यह तिथि और भी खास है, क्योंकि शनिवार 12 अप्रैल 2025 को चैत्र पूर्णिमा के साथ-साथ हनुमान जयंती भी मनाई जाएगी। इस पावन दिन पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और तुलसी माता की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

लेकिन एक छोटी-सी भूल इस शुभ अवसर के प्रभाव को कम कर सकती है और आपकी मेहनत पर पानी फेर सकती है। खासकर तुलसी पूजन में सावधानी न बरती जाए, तो धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं, जिससे आर्थिक संकट आ सकता है। आइए जानते हैं कि तुलसी पूजन में कौन-सी बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है और वह कौन-सी गलतियां हैं, जो बरकत में रुकावट डालती है?

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चैत्र पूर्णिमा पर न तोड़ें तुलसी के पत्ते

हिन्दू धर्म के ग्रंथों और शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि पूर्णिमा, एकादशी और रविवार जैसे शुभ दिनों पर तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित होता है। खासकर चैत्र पूर्णिमा जैसे दिन तो बिल्कुल नहीं। माना जाता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं, जिससे घर की समृद्धि पर असर पड़ सकता है।

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तुलसी के पास सफाई का रखें विशेष ध्यान

जहां तुलसी माता विराजती हैं, वहां गंदगी या कचरा नहीं होना चाहिए। तुलसी स्थान की सफाई न केवल धार्मिक दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है। साफ-सुथरे वातावरण में ही देवी लक्ष्मी का वास होता है।

सूर्यास्त के बाद तुलसी को न चढ़ाएं जल

धार्मिक मान्यता है कि तुलसी को जल केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही अर्पण किया जाना चाहिए। सूर्यास्त के बाद तुलसी माता को जल देना अशुभ माना गया है, जिससे पूजा का फल कम हो सकता है।

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तुलसी माता को काले वस्त्रों से रखें दूर

काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए तुलसी को काले कपड़े से न ढकें, न ही पास में काले रंग की कोई वस्तु रखें। यह भी मां लक्ष्मी की कृपा में रुकावट बन सकता है।

महिलाएं खुले बालों में न करें तुलसी पूजन

चैत्र पूर्णिमा का दिन साल में एक बार आता है, और इसका आध्यात्मिक और भौतिक फल अत्यंत शक्तिशाली होता है। शास्त्रों के अनुसार, महिलाओं को खुले बालों में तुलसी को जल नहीं अर्पित करना चाहिए। यह अशुद्धता की श्रेणी में आता है और पूजा का प्रभाव कम कर सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Apr 10, 2025 09:48 PM

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श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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