Bahula Chauth Vrat Katha: आज 31 अगस्त को भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष चतुर्थी है. आज बहुला चौथ का व्रत है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा के लिए खास होता है. बहुला चतुर्थी पर गाय माता और कृष्ण जी की पूजा करनी चाहिए. इसके साथ ही व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा का पाठ अवश्य करें. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है. आइये आज बहुला चौथ पर पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा के बारे में जानते हैं.

बहुला चौथ पूजा विधि (Bahula Chauth Puja Vidhi)

बहुला चौथ पर भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. भक्त सुबह स्नान कर पूजा स्थान की सफाई करें और चौकी लगाकर गौमाता के साथ वाली श्रीकृष्ण की तस्वीर स्थापित करें. भगवान श्रीकृष्ण के साथ गाय का पूजन करें. आप भगवान को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें. प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं. इसके साथ ही भगवान की आरती करें और भोग लगाएं.

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बहुला चौथ पर गौ माता की पूजा करने के साथ ही गौ सेवा करनी चाहिए. आपके घर के पास मौजूद गाय को हरा चारा खिलाएं. अगर आसपास कहीं गाय नहीं है, तो गौशाला जाकर गाय की सेवा करें और गाय को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाएं. आप गौ सेवा के लिए दक्षिणा के तौर पर अपना योगदान दे सकते हैं.

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बहुला चौथ का महत्व (Bahula Chauth Ka Mahatva)

गौ सेवा और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए रखा जाने वाला बहुला चौथ का व्रत संतान सुख के लिए शुभ माना जाता है. संतान की लंबी उम्र और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए बहुला चौथ का व्रत करना चाहिए. इस व्रत को करने से संतान के जीवन में आने वाले सभी संकटों से रक्षा होती है. आज आज गाय और गाय के बछड़े की पूजा अवश्य करें.

बहुला चौथ की पौराणिक कथा (Bahula Chauth Vrat Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार कामधेनु गाय ने भगवान श्रीकृष्ण की सेवा के लिए बहुला नाम की गाय का रूप लिया था. बहुुला गाय पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ श्रीकृष्ण की सेवा करती थी. एक बार श्रीकृष्ण ने गाय की सत्यनिष्ठा को परखने के लिए शेर का रूप धारण किया. भगवान श्रीकृष्ण ने शेर का रूप धारण कर गाय का मार्ग रोका. शेर को देख गाय डर गई और गाय ने अपने छोटे बछड़े को दूध पिलाने की विनती है. गाय ने कहा कि, वह इसके बाद वापस आ जाएगी. बहुला गाय ने ऐसा ही किया. वह बछड़े को दूध पिलाने के बाद वापस शेर के पास आ गई. भगवान श्रीकृष्ण गाय समर्पण भाव को देख प्रसन्न हुए. वह वास्तविक रूप में आए. बहुला गाय को वरदान दिया कि हर साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गौमाता के रूप में आपकी उपासना की जाएगी.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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