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Mauni Amavasya 2026 Vrat Katha: рдореМрдиреА рдЕрдорд╛рд╡рд╕реНрдпрд╛ рдХреЛ рдмрдбрд╝реА рд╡ рдкреНрд░рдореБрдЦ рдЕрдорд╛рд╡рд╕реНрдпрд╛ рдорд╛рдирд╛ рдЬрд╛рддрд╛ рд╣реИ, рдЬрд┐рд╕рдХрд╛ рд╡реНрд░рдд рдЗрд╕ рдмрд╛рд░ 18 рдЬрдирд╡рд░реА 2026 рдХреЛ рд░рдЦрд╛ рдЬрд╛ рд░рд╣рд╛ рд╣реИ. рд╣рд╛рд▓рд╛рдВрдХрд┐, рдореМрдиреА рдЕрдорд╛рд╡рд╕реНрдпрд╛ рдХреЗ рд╡реНрд░рдд рдХреА рдкреВрдЬрд╛ рдЧреБрдгрд╡рддреА рдФрд░ рдзреЛрдмрди рд╕реЛрдорд╛ рдХреА рдХрдерд╛ рд╕реБрдиреЗ рд╡ рдкрдврд╝реЗ рдмрд┐рдирд╛ рдЕрдзреВрд░реА рд╣реИ. рдпрд╣рд╛рдВ рдкрд░ рдЖрдк рдореМрдиреА рдЕрдорд╛рд╡рд╕реНрдпрд╛ рдХреЗ рд╡реНрд░рдд рдХреА рдХрдерд╛ рдкрдврд╝ рд╕рдХрддреЗ рд╣реИрдВ.

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Mauni Amavasya 2026 Vrat Katha In Hindi: हिंदुओं के लिए मौनी अमावस्या का खास महत्व है, जिसे स्नान और दान करने के लिए शुभ माना जाता है. इसके अलावा मौनी अमावस्या पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करने का भी विधान है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौनी अमावस्या पर की गई पूजा व कर्म का फल जरूर मिलता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या का व्रत रखा जाता है. साल 2026 में 18 जनवरी, रविवार के दिन मौनी अमावस्या पड़ रही है.

हालांकि, मौनी अमावस्या के व्रत की पूजा गुणवती और सोमा की कथा (gunvati aur dhoban soma ki kahani) पढ़े व सुने बिना अधूरी है. चलिए अब जानते हैं मौनी अमावस्या व्रत की कथा के बारे में.

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मौनी अमावस्या व्रत की कथा (Mauni Amavasya 2026 Vrat Katha)

गुणवती की कुंडली में था दोष

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कांचीपुरी नामक एक नगरी थी, जहां पर एक देवस्वामी नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी धनवती, पुत्री गुणवती और 7 पुत्र के साथ रहता था. ब्राह्मण अपनी बेटी की शादी के सिलसिले में नगर के एक पंडित से मिला और उन्हें बेटी की कुंडली दिखाई. गुणवती की कुंडली देख पंडित चौंक गए और बताया कि उसकी कुंडली में एक दोष है, जिसके कारण शादी के बाद बहुत ही जल्दी उसके पति की मृत्यु हो जाएगी.

धोबिन की सेवा का बताया उपाय

हालांकि, इस दोष से बचने के लिए पंडित ने गुणवती को सिंहल द्वीप में रहने वाली सोमा धोबिन की सेवा करने और उसे अपने घर बुलाकर भोजन कराने का उपाय बताया. पंडित की बात सुनकर ब्राह्मण ने अपनी बेटी को सबसे छोटे बेटे के साथ सोमा धोबिन को लाने के लिए भेज दिया.

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गिद्ध के बच्चों के मन में आई दया

ब्राह्मण के घर से सिंहल द्वीप बहुत दूर था, जहां पहुंचने के लिए एक विशाल सागर को पार करना जरूरी था. गुणवती और उसका भाई तमाम मुश्किलों के बाद सागर तट पर पहुंच गए. लेकिन उन्हें इससे आगे का रास्ता नहीं पता था. ऐसे में थक हारकर वो एक पेड़ के नीचे बैठ गए. जिस पेड़ के नीचे वो लोग बैठे थे, उस पर गिद्ध का एक घोंसला था. गिद्ध के बच्चों ने गुणवती और उसके भाई की पूरी बात सुनी और उनकी मदद करने की ठानी.

गिद्ध ने बताया सही रास्ता

कुछ देर बाद जब गिद्ध की मां आई तो बच्चों ने उसे पूरी बात बताई और कहा कि आपको उनकी मदद करनी होगी. गिद्ध ने गुणवती और उसके भाई को सिंहल द्वीप का सही रास्ता बताया, जिसके कुछ ही समय बाद वो सोमा धोबिन के घर पहुंच गए.

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ये भी पढ़ें- Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर सूर्य-चंद्रमा के साथ आने से होगा अद्भुत ऊर्जा का संचार, इन 3 राशियों को मिलेगा कई समस्याओं से छुटकारा

गुप्त सेवा करने का किया फैसला

भाई-बहन ने धोबिन की गुप्त सेवा करने का फैसला किया. वो रोजाना सुबह उठकर धोबिन का घर साफ करते और उसे लीप देते थे. एक दिन सोमा ने निश्चय किया कि वो सुबह जल्दी उठेगी और देखेगी कि उसके घर को कौन रोज लीपता है. अगले दिन उसने गुणवती और उसके भाई को घर लीपते हुए पकड़ लिया और इसका कारण पूछा.

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गुणवती ने सोमा को पूरी बात बताई, जिसे जानकर उसे हैरानी हुई लेकिन वो उन दोनों की श्रम-साधना से बहुत खुश थी. इसलिए उसने उनके साथ घर चलने का वादा दे दिया. वहां से जाने से पहले सोमा ने अपनी बहू से कहा कि मेरी अनुपस्थिति में यदि किसी परिवार वाले की मृत्यु हो जाती है तो उसका मेरे आने तक अंतिम संस्कार मत करना.

मर गया गुणवती का पति

सोमा के आने की खबर जब ब्राह्मण को मिली तो उसने गुणवती की शादी की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि, फेरे लेने के बाद गुणवती का पति मर गया, जिसके बाद सोमा ने अपने संचित पुण्यों का फल गुणवती को दिया और उसे भगवान विष्णु की पूजा व पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करने का उपाय बताया. जैसे ही गुणवती ने पूजा पूरी की, वैसे ही उसका पति जीवित हो गया.

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सोमा के पति और पुत्र की भी हो गई मृत्यु

कुछ दिन नगर में बिताने के बाद सोमा अपने घर चली गई. घर जाकर उसे पता चला कि अपने पुण्यों का फल देने के बाद उसके पुत्र और पति दोनों की मृत्यु हो गई. इसके बाद सोमा ने भी भगवान विष्णु की पूजा और पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा की. इस उपाय से उसके पति और पुत्र के शरीर में जान वापस आ गई. कहा जाता है कि इसी के बाद से नगर में मौनी अमावस्या के दिन ये उपाय करने व इस कथा को पढ़ने-सुनने की परंपरा शुरू हो गई. इस कथा को पढ़ने से न सिर्फ घर वालों की सेहत में सुधार होता है, बल्कि जीवन में सुख और शांति का भी वास होता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Jan 17, 2026 07:36 AM

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Nidhi Jain

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