होर्मुज स्ट्रेट के साथ ईरान ने दी बाब-अल-मंदेब को भी बंद करने की धमकी, जानें कितना अहम है ये समुद्री रास्ता‌?

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद दुनिया के एक और प्रमुख जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है. इस खबर के सामने आने के बाद चारो ओर खलबली मच गई है. दरअसल, ईरान लेबनान पर ताजा इजरायली हमलों से आग बबूला हो उठा है. उसने कहा है कि अगर इन हमलों को तुरंत नहीं रोका गया तो क्षेत्र में तबाही होना तय है. साथ ही ईरान ने 'बाब अल-मंदेब' को भी ठप करने की खुली धमकी दी है. अगर ईरान यह धमकी सच हुई तो पहले से बर्बाद होती वैश्विक अर्थव्यवस्था डूबने की कगार पर आकर खड़ी हो जाएगी.

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एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस करेगा जवाबी कार्रवाई

एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस करेगा जवाबी कार्रवाई2 / 7

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने सोमवार को एक चेतावनी जारी की और कहा कि अगर इजरायल लेबनान और गाजा में इसी तरह से बम हमले करता रहेगा तो ईरान समर्थित एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

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बाब अल-मंदेब पर भी लगेगी रोक?

बाब अल-मंदेब पर भी लगेगी रोक?3 / 7

कानी ने आगे कहा कि एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस बाब अल मंदेब पर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तरह रोक लगा देगा. बता दें कि एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध की दूरी इस क्षेत्र में ईरान समर्थित गुटों का एक समूह है. इसमें लेबनान का हिजबुल्लाह, यमन के हुती विद्रोही और गाजा के हमास जैसे संगठन शामिल है.

क्या है 'बाब अल मंदेब'?

क्या है 'बाब अल मंदेब'?4 / 7

अरबी भाषा में बाब अल-मंदेब का मतलब होता है- आंसुओं का दरवाजा. यह एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है जो लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित है. यह रास्ता स्वेज कैनाल के जरिए एशिया को यूरोप से सीधे जोड़ता है. यमन और अफ्रीका देश जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित यह मार्ग कहीं-कहीं पर महज 26 से 29 किलोमीटर चौड़ा है. इसके पूर्वी भाग में स्थित अलेक्जेंडर चैनल महज 3.2 किमी चौड़ा है और यहीं से दुनिया के तमाम कमर्शियल जहाज गुजरते हैं.

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क्यों अहम है ये रास्ता?

क्यों अहम है ये रास्ता?5 / 7

ईरान की सीमा से हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद बाब अल-मंदेब की घेराबंदी पूरे विश्व के व्यापार को नुकसान पहुंचा सकती है. जिस तरह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मुख्य रूप से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई के लिए एक बेहद अहम रास्ता है, ठीक वैसे ही अल मंदेब पूरी दुनिया के कंज्यूमर गुड्स की लाइफलाइन है. एशिया में भारत, चीन, जापान के मैन्युफैक्चरिंग हब से यूरोप जाने वाले लगभग हर मालवाहक जहाज को इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है. वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा हर साल इसी संकरे कॉरिडोर से होकर गुजरता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाड़ियां, मशीनरी और कपड़े जैसे उत्पाद शामिल हैं.

ऊर्जा की सप्लाई हो सकती है ठप

ऊर्जा की सप्लाई हो सकती है ठप6 / 7

इस रास्ते से हर रोज 60 से 80 लाख बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए रवाना होते हैं. इसके अलावा, कतर से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की एक बहुत बड़ी खेप इसी रास्ते से पश्चिमी देशों तक पहुंचती है. चूंकि होर्मुज पहले से बंद है, ऐसे में अगर बाब अल-मंदेब भी बंद हुआ तो दुनिया में तेल और गैस की किल्लत और बढ़ेगी.

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बढे़गी और महंगाई

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ईरान समर्थित हुती विद्रोही अक्सर पूर्व में भी यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं. अब ईरान ने इशारा किया है कि हुती यहां फिर से एक्टिव हो सकते हैं. ऐसे में अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है तो तो जहाजों को पूरे अफ्रीकी महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते से यूरोप तक जाना पड़ेगा. इस वैकल्पिक रास्ते से जाने पर यात्रा का समय करीब 10 से 14 दिन बढ़ जाएगा. इससे ईंधन का खर्च दोगुना हो जाएगा.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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