यूपी के इस शहर में 'किताबों का खजाना', यहां दुनियाभर की सवा लाख से ज्यादा बुक्स
Uttar Pradesh Oldest Library: क्या आप जानते हैं यूपी के इस शहर में 162 साल पुराना एक ऐसा 'किताबों का महल' है, जहां सवा लाख से ज्यादा दुर्लभ पुस्तकें और अरबी पांडुलिपियां मौजूद हैं? जानिए क्यों दुनिया भर के बुक लवर्स के लिए यह लाइब्रेरी आज भी जन्नत से कम नहीं है.

देश की टॉप 10 लाइब्रेरी में शामिल
2 / 5प्रयागराज की राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी का नाम देश के 10 सबसे बेहतरीन पुस्तकालयों में शुमार है. 1864 में स्थापित हुई यह लाइब्रेरी न केवल उत्तर प्रदेश की सबसे पुरानी लाइब्रेरी है, बल्कि यह इतिहास और स्थापत्य कला का भी बेजोड़ नमूना है. स्कॉटिश बैरोनियल रिवाइवल शैली में बनी इसकी भव्य इमारत को प्रसिद्ध वास्तुकार रिचर्ड रास्किल बाएन ने डिजाइन किया था. पिछले 162 सालों से यह लाइब्रेरी ज्ञान की रोशनी फैला रही है.
सवा लाख किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियां
3 / 51864 में स्थापित इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल संग्रह है. यहां 1.25 लाख (सवा लाख) से अधिक किताबें मौजूद हैं. यहां का खजाना सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां 40 से अधिक श्रेणियों की मैगजीन, 28 अलग-अलग क्षेत्रीय और राष्ट्रीय समाचार पत्र और 21 दुर्लभ अरबी पांडुलिपियां उपलब्ध हैं.
हर भाषा के पाठकों के लिए खास
4 / 5यहां आपको हिंदी, अंग्रेजी के अलावा उर्दू, संस्कृत, अरबी, फारसी, बंगला और फ्रेंच जैसी भाषाओं की ऐसी दुर्लभ पुस्तकें मिल जाएंगी, जो शायद पूरे देश में कहीं और न मिलें. यही वजह है कि यहां दूर-दूर से शोधकर्ता और विद्वान अपनी ज्ञान की प्यास बुझाने आते हैं.
शिक्षा की राजधानी है प्रयागराज
5 / 5लाइब्रेरी के अलावा प्रयागराज का कोना-कोना पढ़ाई को समर्पित है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पास कटरा, सलोरी, छोटा बघाड़ा और गोविंदपुर जैसे इलाकों की सड़कों पर बिछी किताबों की दुकानें इस शहर को सही मायनों में 'किताबों का शहर' बनाती हैं. अगर आप भी किताबों से प्यार करते हैं, तो प्रयागराज की यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी आपके लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है.
.png)