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भारत में मछलियों की कई प्रजातियां मशहूर हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश की पुलासा मछली की बात ही अलग है. यह अपनी खास बनावट, स्वाद और सीमित उपलब्धता के कारण देश की महंगी मछलियों में गिनी जाती है. कई रिपोर्ट बताते हैं कि इसकी कीमत कई बार 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. लेकिन इसमें ऐसा क्या खास है, आइए जानते हैं.
आंध्र प्रदेश में क्यों है पुलासा की इतनी मांग?

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आंध्र प्रदेश में पुलासा मछली को सिर्फ एक भोजन नहीं बल्कि एक खास परंपरा का हिस्सा भी माना जाता है. यहां लोग इसे त्योहारों, खास मौकों और खासकर दामाद के स्वागत के समय बनाना पसंद करते हैं. इसके स्वाद के कारण इसकी काफी मांग रहती है.
मंगलसूत्र बेचकर खाते हैं लोग

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तेलुगु भाषा में पुलासा को लेकर एक मशहूर कहावत है कि 'पुस्तेलु अम्मैना पुलासा तिनावाली', जिसका मतलब है कि जरूरत पड़े तो शादी के गहने बेचकर भी पुलासा खानी चाहिए. यह कहावत मछली की लोकप्रियता और लोगों के अंदर इसके जुनून को दिखाती है.
कहां से आती है ये मछली

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पुलासा मछली असल में बंगाल की खाड़ी के खारे पानी से निकलकर गोदावरी नदी के मीठे पानी तक पहुंचती है. इस लंबी यात्रा के दौरान इसके स्वाद और मांस की गुणवत्ता में काफी बदलाव आता है, जो इसे बाकी मछलियों से अलग बनाता है. बता दें कि समुद्र में इसे इलिसा (Ilisa) कहा जाता है और जब ये नदी में आ जाती है, तब पुलासा कहलाती है.
साल में कुछ महीनों के लिए ही मिलती है पुलासा

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पुलासा मछली की उपलब्धता पूरे साल नहीं रहती. इसका मुख्य सीजन जुलाई से सितंबर तक रहता है. सीमित समय में मिलने और इसकी मांग ज्यादा होने के कारण इसकी कीमत काफी बढ़ जाती है. रिपोर्ट बताते हैं कि बड़ी पुलासा की कीमत हजारों रुपये तक पहुंच जाती है, जिसे खरीदना हर किसी के बस की नहीं होती.
अंडे देने के लिए नदी में आती है मछली

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पुलासा मछली समुद्र से निकलकर गोदावरी नदी में अंडे देने के लिए आती है. इस दौरान इसके शरीर में फैट और स्वाद में बदलाव होता है. यही वजह है कि नदी में आने के बाद इसका स्वाद ज्यादा बेहतर माना जाता है.
पुलासा मछली से बनती है आंध्र की मशहूर डिश

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आंध्र प्रदेश में पुलासा मछली से बनने वाली सबसे मशहूर डिश 'पुलासा पुलुसु' है. इसे पारंपरिक तरीके से इमली, मसाले, अदरक-लहसुन और मिर्च के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है. कहा जाता है कि इसका स्वाद इतना शानदार होता है कि अगर कोई मछली खाने वाला एक बाद इसे खा ले, तो वह इसके स्वाद का दीवाना हो जाएगा.
16 घंटे तक पकती है यह खास करी

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आपको जानकर हैरानी होगी कि पारंपरिक तरीके से बनाई जाने वाली पुलासा पुलुसु को 16.17 घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. लंबे समय तक पकने से मछली के कांटे नरम हो जाते हैं और करी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. यही इसकी खासियत मानी जाती है. (Image: AI/Pexels)
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