'गुलाब जामुन का शहर' कहलाता है यूपी का ये जिला, मुंह में जाते ही घुल जाती है मदहोश करने वाली मिठास
यूं तो उत्तर प्रदेश के कई शहरों में आपको लजीज खाना मिलेगा. यूपी के हर शहर ने खाने को लेकर अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है. किसी शहर के समोसे फेमस हैं, तो कहीं जलेबी बहुत अच्छी मिलती है. कहीं नानवेज खाना बहुत अच्छा है तो कहीं वेज खाना भी लाजवाब मिलता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के किस शहर को 'गुलाब जामुन का शहर' कहा जाता है? नहीं ना... तो आज हम आपको बताएंगे कि यूपी का वो कौन का अनोखा शहर हैं जिसे गुलाब जामुन का शहर कहा जाता है.

ये है गुलाब-जामुन का शहर
2 / 7वैसे तो यूपी के हर शहर में आपको गुलाब जामुन की दुकान मिल जाएगी, लेकिन ये एक ऐसा शहर है जहां पर एंट्री करते ही गुलाब जामुन की तेज और मीठी महक आपको अपनी ओर खींचेगी. दरअसल हम बात कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के मैगलगंज कस्बे की. मैगलगंज कस्बे में एंट्री करते ही गुलाब जामुन की तेज खुशबू हर आने-जाने वाले व्यक्ति को अपनी ओर खींच लेती है.
'गुलाब जामुन खाकर जाइएगा'
3 / 7यहां पर सड़क के किनारे लगे बोर्ड पर लिखा होता है, 'मैगलगंज में आपका स्वागत है, गुलाब जामुन खाकर जाइएगा...'. इतना ही नहीं सच कहें तो यहां से बिना गुलाब-जामुन खाए लौटना भी नामुमकिन ही है. यहां पहुंचने के बाद आप सिर्फ महक से ही इसकी ओर आकर्षित होते चले जाएंगे और एक गुलाब जामुन तो खाकर ही वापस आएंगे.
हर गली और चौराहे पर है गुलाब जामुन की दुकान
4 / 7बता दें कि मैगलगंज में हर एक चौराहे और गलियों में गुलाब जामुन की दुकान आपको दिख ही जाएगी. खास बात यह है कि यहां की हर एक दुकान में बोर्ड पर 'मशहूर गुलाब-जामुन की दुकान' लिखा हुआ भी जरूर मिलेगा.
भीड़ बताएगी असली दुकान
5 / 7साथ ही शुद्ध खोए से बने गुलाब-जामुन जैसे दावों के पोस्टर भी आपको हर दुकान पर दिख जाएंगे. असली और ओरिजनल गुलाब-जामुन की पहचान अगर कहीं होती है तो वह है भीड़. दुकान पर लगी भीड़ से ही आपको पता चल जाएगा कि असली और बेहतरीन गुलाब-जामुन आपको किस दुकान पर मिलेंगे. यह भीड़ जहां सबसे ज्यादा देखने को मिलती है वह दुकान है 'धनपाल मिष्ठान भंडार'.
1941 से मैगलगंज चौराहे पर है ये दुकान
6 / 7मैगलगंज में दर्जनों मिठाई की दुकानें हैं, वहां कभी एक भी दुकान हुआ करती थी साल 1941 से मैगलगंज चौराहे पर एक छप्पर के नीचे श्यामलाल यज्ञसैनी ने गुलाब-जामुन की एक छोटी सी दुकान शुरू की थी. यहीं दुकान आज धनपाल मिष्ठान भंडार के नाम से जानी जाती है. श्यामलाल की बनाई मिठाई धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर चढ़ने लगी और फिर देखते ही देखते यह दुकान मैगलगंज की पहचान बन गई.
मुंह में गुलाब जामुन जाते ही घुल जाता है
7 / 7खोया और छेने से बने ये सुनहरे-भूरे, नरम गोले, इलायची और गुलाब जल की महक वाली चाशनी में डूबे गुलाब जामुन मुंह में जाते ही घुल जाते हैं. शादी-ब्याह हो या त्योहार यहां से गुजरते राहगीर रुकता जरूर है. यहां लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शाहजहांपुर और लखनऊ से भी लोग सिर्फ गुलाब-जामुन खाने आते हैं.