एशिया का सबसे साफ गांव भारत के इस राज्य में है, सुंदरता देख बसने का करेगा मन

इस गांव में एक भी सफाईकर्मी नहीं है, लेकिन उसके बाद भी पिछले 22 साल से सफाई में यह गांव टॉप पर बना हुआ है. इसी वजह से यह न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। इस छोटे से गांव का नाम मावलिननॉन्ग है. आइए जानते हैं कि एशिया का सबसे साफ गांव आखिर भारत के किस प्रदेश में है और यहां पर कैसे पहुंच सकते हैं.

Asia Cleanest Village, Mawlynnong Village, northeastern state of Meghalaya
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एशिया का सबसे स्वच्छ गांव 'मावलिननॉन्ग' पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में स्थित है अगर आप भी नई-नई जगहें देखना पसंद करते हैं तो गर्मियों में हीटवेव से बचने के लिए आप इस गांव की ट्रिप प्लान कर सकते है. सबसे खास बात यह है कि इस छोटे से गांव की दुनियाभर में तारीफ होती है, क्योंकि बिना किसी सफाई कर्मचारी के भी यह सबसे ज्यादा साफ-सुथरा गांव है. प्लास्टिक मुक्त और ईको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल वाले इस गांव की खूबसूरती देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. इसी वजह से यह न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है.

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साफ-सफाई की जिम्मेदारी

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इस गांव की सबसे खास बात यहां के लोगों की सोच है. इस गांव के हर इंसान को साफ-सफाई की जिम्मेदारी दी जाती है, यहां बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग मिलकर अपने गांव को साफ रखते हैं. लोग कहीं भी कचरा नहीं फेंकते और हर जगह आपको बांस से बने डस्टबिन दिखाई देंगे.

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प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन

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मेघालय में स्थित इस छोटे से गांव मावलिननॉन्ग में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक है. यहां के लोग पर्यावरण सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं और बांस और दूसरी चीजों का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि गांव में हरियाली और स्वच्छता दोनों बनी रहती है, क्योंकि लोग कचरा ही कम करते हैं.

सफाई की अनोखी व्यवस्था

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मावलिननॉन्ग में हर घर के बाहर और गलियों में सफाई का खास ध्यान रखा जाता है, यहां रोजाना सफाई की जाती है. कचरे को लोग जैविक और अजैविक कचरे में अलग-अलग बांटकर रखते हैं. कचरा भी यहां पर काम की चीज है, क्योंकि जैविक कचरे से लोग नेचुरल खाद बनाते हैं.

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लाइफस्टाइल का हिस्सा है

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लोगों के लिए साफ-सफाई सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का हिस्सा है. बच्चों को छोटी उम्र से ही स्वच्छता का महत्व सिखाया जाता है, स्कूलों में भी साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि यहां के लोग हमेशा अपने वातावरण को साफ रखने के लिए प्रेरित रहते हैं.

सुंदरता देखने आते टूरिस्ट

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मावलिननॉन्ग अब एक फेमस टूरिस्ट प्लेस बन चुका है, देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इस गांव को देखने आते हैं. यहां की साफ-सुथरी सड़कें, हरियाली और नेचर की खूबसूरती लोगों को बहुत अट्रैक्ट करती है. गांव में एक स्काई वॉक भी है, जहां से आसपास के सुंदर नजारे देखे जा सकते हैं.

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संडे को नहीं मिलेगी एंट्री

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रोजाना मावलिननॉन्ग हजारों लोग आते हैं और वहां की हरियाली और सुकून भरी जिंदगी का मजा लेते हैं. मगर साल 2023 के बाद से एक नियम बनाया गया है, जिसके मुताबिक रविवार के दिन किसी बाहरी को गांव में एंट्री नहीं मिलती है, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि संडे वहां न जाएं.

मावलिननॉन्ग जाने का रूट

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इस गांव तक जाने के लिए पहले गुवाहाटी या शिलॉंग पहुंचना होगा. यहां से टैक्सी लेकर शिलॉन्ग होते हुए मावलिननॉन्ग जा सकते हैं. शिलॉन्ग से दूरी करीब 80 से 90 किमी है, जिसमें 2.5 से 3 घंटे लगते हैं, रास्ते में डावकी की खूबसूरत नदी देखने को मिलती है, जो सफर को यादगार बना देती है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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