दुनिया के नक्शे पर ऐसा भी देश है जिसे कुदरत ने सुंदर पहाड़ों, शांत झीलों और सुंदर प्राकृतिक संसाधनों से आबाद किया है. लेकिन इस जगह की असली खूबसूरती यहां के लोगों से है, जिसने इसे दुनिया के सबसे सुखी देशों की लिस्ट में शामिल किया है.
अमीरी का दिखावा नहीं करते लोग

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इस अनोखे देश में अमीरी का दिखावा करना बेहद खराब माना जाता है और यहां के लोग बेहद सादगी से अपना जीवन बिताते हैं.
लोगों की पढ़ाई और इलाज का खर्चा सरकार उठाती है

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यहां की एक बात जो दूसरों को हैरान कर देती है वो ये है कि यहां रहने वाले नागरिकों की पढ़ाई से लेकर इलाज तक का खर्चा यहां की सरकार खुद उठाती है. अपनी इसी बेहतरीन व्यवस्था के कारण यह देश आज के समय में पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन चुका है.
नार्वे की राजधानी ओस्लो

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इस देश के समाज में समानता की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिसे 'जांटलोवन' नाम के एक अलिखित नियम से समझा जा सकता है. इस नियम का सीधा सा मतलब है कि ‘तुम खुद को दूसरों से बेहतर या बड़ा मत समझो’. यही वजह है कि यहां कोई भी अपनी दौलत का प्रदर्शन नहीं करता.
अमीरी और गरीबी के बीच की खाई बेहद कम

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किसी के पास कितनी भी संपत्ति क्यों न हो, वह महंगी गाड़ियों या बड़े बंगलों के जरिए दिखावा करने से बचता है. यहां अमीरी और गरीबी के बीच की खाई दुनिया में सबसे कम है, क्योंकि आर्थिक स्तर पर लगभग हर नागरिक एक जैसी सुख-सुविधाओं का आनंद लेता है.
लोग अपने घरों के दरवाजे छोड़ देते हैं खुले

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ओस्लो में सुरक्षा का आलम यह है कि छोटे शहरों और गांवों में लोग अपने घरों के दरवाजे खुले छोड़ देते हैं. यहां तक कि 6 से 7 साल के छोटे बच्चों को भी अकेले स्कूल भेजने में माता-पिता को कोई डर नहीं सताता.
कितनी है देश के लोगों की आमदनी?

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अगर यहां के नागरिकों की आमदनी की बात करें, तो एक औसत व्यक्ति की मासिक सैलरी लगभग 5 लाख रुपये यानी 5,914 डॉलर होती है. लेकिन इस मोटी कमाई पर लोगों को भारी-भरकम टैक्स चुकाना पड़ता है, जो कि 30% से लेकर 45% तक होता है.
कितना देना होता है टैक्स?

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एक उदाहरण के तौर पर समझे कि यहां जो व्यक्ति सालाना 68 लाख रुपये कमाता है, टैक्स कटने के बाद उसके हाथ में केवल 41 से 45 लाख रुपये ही बचते हैं. यह देश दुनिया के 6 सबसे महंगे देशों में गिना जाता है, लेकिन यहां हर किसी के पास अपना घर, गाड़ी और केबिन मौजूद है.