लखनऊ के लिए ये सीजन निराशाजनक रहा, वे अपने 14 लीग मैचों में से सिर्फ 4 ही जीत पाए. प्लेइंग कॉम्बिनेशन में बार-बार किए गए बदलाव चर्चा का विषय बन गए, जिसमें कई खिलाड़ी टीम से अंदर-बाहर होते रहे. बदोनी ने भी पूरे सीजन में अलग-अलग बैटिंग पोजिशंस पर खेला और कोई कंसिस्टेंसी नहीं बना पाए; 10 पारियों में उनका औसत 22 से भी कम रहा.

2 / 6
अपने यू-ट्यूब चैनल पर बोलते हुए, अश्विन ने टीम मैनेजमेंट की सिलेक्शन रणनीति पर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि जहां कुछ खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को बार-बार मौके मिलते रहे, वहीं बदोनी को लगातार खेलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि उन्हें टीम के सबसे होनहार इंडियन टैलेंट्स में से एक माना जाता था.

3 / 6
अश्विन ने कहा, 'निकोलस पूरन पूरे सीजन में गेंद को ठीक से बल्ले से नहीं लगा पाए, फिर भी टीम ने उनका बार-बार साथ दिया. आयुष बदोनी को भारतीय टीम में जगह मिली थी, फिर भी उन्हें एलएसजी के लिए कई मैचों में बाहर बैठना पड़ा. उन्हें बदोनी को लगातार खेलने का मौका देना चाहिए था. फिर, मुकेश चौधरी को 'अगला बेहतरीन फिनिशर' कहने के बाद भी उन्हें बाहर बिठाकर हिम्मत सिंह को खिलाया गया.'

4 / 6
अश्विन ने एक और बात पर भी जोर दिया, जिसे उन्होंने कप्तान ऋषभ पंत से जुड़ी एक बड़ी रणनीतिक गलती माना. इस पूर्व ऑफ-स्पिनर के मुताबिक, पंत को बैटिंग ओपन करने के लिए ऊपर भेजना चाहिए था; ये एक ऐसा कदम होता जिससे उन्हें अपना कॉन्फिडेंस वापस पाने और बल्ले से ज्यादा लगातार योगदान देने में मदद मिल सकती थी.

5 / 6
अश्विन ने कहा, 'अगर वे पंत से बैटिंग ओपन करवाते, तो वे उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवा सकते थे. अगर उन्होंने ओपनिंग करते हुए 600 रन बनाए होते, तो वो कप्तानी भी बेहतर करते और ये कहने के बजाय कि 'बहुत ज्यादा लोग फैसले ले रहे हैं', वो कोचों की बात सुनते. जब उन्होंने पंत के साथ 'म्यूजिकल चेयर्स' का खेल शुरू किया, तो उनका आधा टूर्नामेंट तो वहीं खत्म हो गया था.'

6 / 6
ऋषभ पंत का सीजन कभी भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाया; इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 14 मैचों में 28.36 की औसत और 138.05 के स्ट्राइक रेट से कुल 312 रन बनाए. ये प्रदर्शन IPL 2026 में LSG के कुल संघर्षों को ही दर्शाता है.