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सनातन धर्म के लोगों के लिए कलावे का खास महत्व है, जिसे पूजा से पहले हाथ में सुरक्षा कवच के तौर पर बांधा जाता है. अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग कैंची से कलावे को काटते हैं और फिर हाथ में बांधते हैं. इसके अलावा कई लोग हाथ में बंधा कलावा भी कैंची से ही काटकर उतारते हैं. यदि आप भी यही गलती कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं. दरअसल, शास्त्रों में कलावे को उतारने से लेकर उसे रखने तक के कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें फॉलो न करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. आइए विस्तार से जानें कलावे से जुड़े जरूरी नियमों के बारे में.
किस दिन कलावा उतारना चाहिए?

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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, मंगलवार के दिन आप अपने हाथ से कलावा उतार सकते हैं. यदि किसी कारण से इस दिन कलावा नहीं उतार पाते हैं तो शनिवार को भी ये कार्य कर सकते हैं.
कलावे को कैंची से काटें या नहीं?

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कैंची, चाकू या किसी भी धारदार हथियार से कलावे को नहीं काटना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको पाप लग सकता है. साथ ही कुछ अशुभ घटनाएं आपके साथ घट सकती हैं.
पुराने कलावे का क्या करें?

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पुराने कलावे को किसी बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए. इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे भी आप इसे किसी गड्ढे में गाड़ सकते हैं. इससे आपके ऊपर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.
कितने दिन तक कलावा हाथ में बांधना चाहिए?

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शास्त्रों के अनुसार, कुल 21 दिन तक हाथ में कलावा बांधना चाहिए. 21 दिन तक कलावे में सकारात्मक ऊर्जा रहती है, जिसके कारण किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर नहीं पड़ता है. बता दें कि एक बार हाथ से कलावा उतारने के बाद दोबारा उसे नहीं बांधना चाहिए.
कलावा उतारने की विधि

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किसी भी शुभ दिन स्नान करने के बाद मंदिर घर में बैठकर अपने हाथ से आप कलावा उतार सकते हैं, जिसे तुरंत ही विसर्जित कर दें. यदि विसर्जन करने में समय है तो तब तक आप उसे मंदिर में रख सकते हैं. बता दें कि पुराना कलावा उतारने के बाद तुरंत नया कलावा बांध सकते हैं. (All Photo Credit- Social Media & Meta AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.