हवा में झूलते खंभे, लगातार जलती ज्वाला और गुप्त तहखाने... वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए भारत के इन मंदिरों का रहस्य

भारत में कई प्राचीन और रहस्यमय मंदिर हैं, जिनकी कहानियां सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी मशहूर हैं. सोशल मीडिया पर कई मंदिरों के रहस्य को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. आज हम आपको भारत के उन मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके रहस्य आज भी अनसुलझे हैं.

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भारत में कई प्राचीन और रहस्यमय मंदिर हैं, जिनकी कहानियां सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी मशहूर हैं. सोशल मीडिया पर कई मंदिरों के रहस्य को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. आज हम आपको भारत के उन मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके रहस्य आज भी अनसुलझे हैं.  

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पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)

पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)2 / 8

देश के अलग-अलग राज्यों से कई श्रद्धालु केलर के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर में माथा टेकने पहुंचते हैं. पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने की चर्चा उस समय दुनियाभर में फैली, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसके तहखानों की जांच में अरबों डॉलर की कीमत का खजाना मिला. मंदिर के कई तहखाने तो खोले गए लेकिन 'वॉल्ट B' नाम का एक कक्ष मंदिर की परंपराओं और कानूनी संवेदनशीलताओं के कारण नहीं खोला गया. इसके अंदर क्या है, यह अभी भी रहस्य ही है.

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वेराबत्रा मंदिर (आंध्र प्रदेश)

वेराबत्रा मंदिर (आंध्र प्रदेश)3 / 8

विजयनगर काल में बने इस मंदिर की सबसे मशहूर बात है 'झूलता स्तंभ' ऐसा खंभा जो जमीन पर पूरी तरह टिकता हुआ नहीं दिखता. पुरातत्व सर्वेक्षण और इंजीनियरिंग के कई अध्ययन हो चुके हैं, लेकिन यह औरों में सबसे रोचक रहस्य बना हुआ है. अभी भी यहां आने वाले लोग उस स्तंभ के नीचे कपड़ा फिसलाकर अंतर दिखाते हैं.

कैलाश मंदिर (महाराष्ट्र)

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यह दुनिया के सबसे बड़े एकल पत्थर से बने स्मारकों में से एक है. इस मंदिर को ऊपर से नीचे की ओर काटकर बनाया गया, यानी ऊपर से खोदा गया, न कि अलग-अलग पत्थर जोड़कर. इतनी मात्रा में चट्टान हटाने और काम की स्केल आज भी शोधकों को हैरान करती है.

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कोणार्क सूर्योदय मंदिर (ओड़िशा)

कोणार्क सूर्योदय मंदिर (ओड़िशा)5 / 8

कोणार्क से जुड़ी एक पुरानी कहानी है कि मंदिर की छत पर एक बहुत बड़ी चुंबकीय चट्टान (लॉडस्टोन) लगी थी. एएसआई और इतिहासकारों ने इस बात का ठोस प्रमाण नहीं पाया है, फिर भी यह किस्सा लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध है.

ज्वाला जी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)

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यह मंदिर अपने आप जलने वाली आग की लौ के लिए मशहूर है जो चट्टान की दरारों से ज्वालाएं लगातार निकलती हैं. भूवैज्ञानिकों ने इसे प्राकृतिक गैस रिसाव से जोड़कर देखा है, हालांकि अभी तक लौ की के स्त्रोत का पता नहीं चल पाया है. भक्तों के लिए ये लौ देवी का रूप मानी जाती है.

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बृहदेश्वर मंदिर (तमिलनाडु)

बृहदेश्वर मंदिर (तमिलनाडु)7 / 8

रजा राजा चोला ने 11वीं सदी में बनाया यह मंदिर ऊंचे शिखर और ऊपर एक लगभग 80 टन का ग्रेनाइट का सिरोपा रखने के लिए जाना जाता है. यूनेस्को और एएसआई के अनुसार शायद एक बड़ी मिट्टी की ढुलाई-ढांचे से पत्थर ऊपर रखा गया होगा, लेकिन असली तरीके की सटीक योजना आज भी इतिहासकारों के लिए एक बहस का विषय है.

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (गुजरात)

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (गुजरात)8 / 8

आपको जानकर हैरानी होगी कि ज्वार के समय यह मंदिर पानी में डूब जाता है और फिर पानी उतरते ही वापस दिखने लगता है. गुजरात पर्यटन और स्थानीय अधिकारियों के पास इस घटना का अच्छा-खासा डॉक्यूमेंट है, इसलिए यह अनुभव बहुत अलग और दिलचस्प माना जाता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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