देश में इस हाई कोर्ट के जज क्यों पहनते हैं अंग्रेजों की तरह लाल रंग का रोब और विग? दिलचस्प है वजह

राजभवन में गुरुवार को आर. एन. रवि का पश्चिम बंगाल के 22वें गवर्नर के तौर पर शपथ ग्रहण समारोह न सिर्फ राजनीतिक बदलाव के लिए बल्कि उनके पहनावे के कारण भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

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आर. एन. रवि ने ली 22वें गवर्नर के तौर पर शपथ

आर. एन. रवि ने ली 22वें गवर्नर के तौर पर शपथ2 / 8

राजभवन में गुरुवार को आर. एन. रवि का पश्चिम बंगाल के 22वें गवर्नर के तौर पर शपथ ग्रहण समारोह न सिर्फ राजनीतिक बदलाव के लिए बल्कि उनके पहनावे के कारण भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

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कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल ने दिलाई शपथ

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बता दें कि आर. एन. रवि को बंगाल के राज्यपाल पद की शपथ कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल ने दिलाई. इस दौरान समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद रहीं. शपथ समारोह के दौरान जस्टिस पॉल गहरे लाल रंगा का रोब और उसके साथ औपनिवेशिक शैली का कोर्ट विग पहने हुए थे. उनके इस पहनावे ने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

जस्टिस पॉल का ड्रेस कोड हो रहा वायरल

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बता दें कि आर. एन. रवि को बंगाल के राज्यपाल पद की शपथ कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल ने दिलाई. इस दौरान समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद रहीं. शपथ समारोह के दौरान जस्टिस पॉल गहरे लाल रंगा का रोब और उसके साथ औपनिवेशिक शैली का कोर्ट विग पहने हुए थे. उनके इस पहनावे ने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

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कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर ली थी शपथ

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर ली थी शपथ5 / 8

जस्टिस पॉल ने ठीक यही पोशाक तब भी पहनी थी, जब इसी साल जनवरी में उन्होंने पश्चिम बंगाल के गवर्नर सी. वी. आनंद बोस के हाथों कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली थी, इस दौरान उन्होंने पिछले जजों द्वारा अपनाई गई परंपरा का ही पालन किया था.

न्यायिक विग है 17वीं सदी की ब्रिटिश कानूनी परंपरा

न्यायिक विग है 17वीं सदी की ब्रिटिश कानूनी परंपरा6 / 8

ये न्यायिक विग 17वीं सदी की ब्रिटिश कानूनी परंपरा से जुड़ी हुई है, जो आज के समय में भारत के शपथ ग्रहण समारोहों में मुश्किल से देखने को मिलती है. इसलिए इस समारोह में उनका दिखना सबसे अलग था. वहीं, इसके बाद से ही ये सवाल भी उठने लगे कि कलकत्ता हाईकोर्ट के जज कभी-कभी ऐसी पोशाक क्यों पहनते हैं, जो 19वीं सदी के ब्रिटिश जजों की पोशाक जैसी लगती है.

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क्यों पहनते हैं आज भी ऐसी पोशाक?

क्यों पहनते हैं आज भी ऐसी पोशाक?7 / 8

इस सवाल का जवाब भी भारत की उच्च न्यायपालिका की औपनिवेशिक जड़ों में ही छिपा हुआ है. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की अदालतों ने भी वही परंपराएं अपनाई थीं, जो इंग्लैंड में प्रचलित थीं. बता दें कि जज और वकील ब्रिटिश अदालत में पहना जाने वाला रोब, बैंड और विग जैसी ही पोशाकें पहनते थे. आजादी के बाद भी इनमें से कई रीति-रिवाज आज भी जारी हैं. दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट भारत का सबसे पुराना हाईकोर्ट है, इसकी स्थापना 1 जुलाई, 1862 को हुई थी. 'हाई कोर्ट्स एक्ट, 1861' के तहत स्थापित इस अदालत का अधिकार क्षेत्र पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक फैला हुआ है. हालांकि, बंबई और मद्रास हाईकोर्ट की स्थापना भी 1862 में ही हुई थी, लेकिन सबसे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने ही काम करना शुरू किया था.

यह शैली सीधे तौर पर ब्रिटिश अदालतों की पोशाक से ही ली गई

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वकीलों के लिए कानूनी ड्रेस कोड में भी इन्हीं परंपराओं को आगे बढ़ाया गया है. बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक. वकीलों को आज भी काले कोट या शेरवानी के साथ सफेद रंग का नेक-बैंक पहनना अनिवार्य है. यह शैली सीधे तौर पर ब्रिटिश अदालतों की पोशाक से ही ली गई है. भारतीय कानूनी व्यवस्था में इस तरह की परंपराओं का आज भी जारी रहना, अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस वी. आर. कृष्ण अय्यर ने एक बार कहा था कि 'छह दशक बीत जाने के बाद भी भारतीय अदालतों ने अपनी वेशभूषा, यहां तक कि कॉलर और बैंड भी, अंग्रेजों से ही उधार लिए गए हैं.'

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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