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भारतीय रेलवे का इतिहास सिर्फ पटरियों और ट्रेनों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन ऐतिहासिक इमारतों की गाथा है जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी. 19वीं सदी के मध्य में जब पहली बार ट्रेन चली, तो इन स्टेशनों ने व्यापार, यात्रा और मेल-जोल के नए द्वार खोले. आज भी ठाणे, हावड़ा और रॉयपुरम जैसे स्टेशन न केवल परिचालन में हैं, बल्कि अपनी पुरानी वास्तुकला और गरिमा को संजोए हुए हैं. आज जानेंगे कैसे ये 7 सबसे पुराने रेलवे स्टेशन आज भी भारतीय रेल की धड़कन बने हुए हैं.
ठाणे रेलवे स्टेशन, महाराष्ट्र

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भारतीय रेल की जननी! 1853 में भारत की पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर से ठाणे के बीच चली थी. आज यह मुंबई का सबसे व्यस्त उपनगरीय स्टेशन है.
हावड़ा जंक्शन, पश्चिम बंगाल

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1854 में स्थापित यह स्टेशन पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार है. हुगली नदी के किनारे स्थित हावड़ा जंक्शन अपनी भव्यता और भारी भीड़ के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.
रॉयपुरम रेलवे स्टेशन, तमिलनाडु

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1856 में शुरू हुआ यह स्टेशन भारत की सबसे पुरानी स्टेशन इमारत मानी जाती है. कभी यह दक्षिण भारत में व्यापार का मुख्य केंद्र था.
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, महाराष्ट्र

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पहले 'बोरी बंदर' के नाम से मशहूर इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की वर्तमान इमारत 1887 में बनी थी. यह विक्टोरियन गोथिक वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है.
चेन्नई सेंट्रल, तमिलनाडु

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1873 में बना यह स्टेशन दक्षिण भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है. इसकी लाल ईंटों वाली शानदार इमारत चेन्नई की पहचान बन चुकी है.
सियालदह रेलवे स्टेशन, पश्चिम बंगाल

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1869 में शुरू हुआ सियालदह स्टेशन कोलकाता को उपनगरीय इलाकों और पूर्वोत्तर भारत से जोड़ता है. यह लाखों यात्रियों की दैनिक जीवन रेखा है.
प्रयागराज जंक्शन, उत्तर प्रदेश

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19वीं सदी के मध्य में स्थापित यह स्टेशन भारत के प्रमुख रेल चौराहों में से एक है. यह स्टेशन स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर तीर्थयात्रियों तक की हजारों कहानियों का गवाह रहा है.