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Why Blue Colour Once Most Expensive: नीले रंग का इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है. आप कहीं ना कहीं नीला रंग पेंट, कपड़ों या आर्ट में देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब नीला रंग इतना कीमती हुआ करता था कि इसकी कीमत सोने से भी ज्यादा होती थी? तब इसका इस्तेमाल बहुत कम किया जाता था, क्योंकि इसे अफगानिस्तान में मिलने वाले लाजुली पत्थर से बनाया जाता था. इसकी और भी बहुत खासियत हैं जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए.
लैपिस लाजुली पत्थर से किया जाता था तैयार

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नीले रंग की कीमत कभी सोने जितनी महंगी हुआ करती थी. तब इसे अल्ट्रामरीन ब्लू के नाम से जाना जाता था और अफगानिस्तान के लैपिस लाजुली पत्थर से बनाया जाता था. इसकी निर्माण प्रक्रिया और दुर्लभता के कारण यह रईसी की पहचान बन गया था।
खास तरीके से बनता था नीला रंग

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पुराने समय में इस पत्थर को पीसकर एक खास प्रक्रिया से गुजारा जाता था, जिससे अल्ट्रामरीन नाम का नीला रंग तैयार होता था. पहले पत्थर को बारीक पाउडर में बदला जाता था. फिर इसे मोम, तेल और दूसरी चीजों के साथ मिलाया जाता था.
क्यों था इतना महंगा?

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इसकी महंगाई के पीछे कई कारण थे जैसे- लैपिस लाजुली का कम उपलब्ध होना, बनाने का तरीका मुश्किल होना, पत्थर की खासियत आदि. इसलिए यह तब सोने से भी ज्यादा महंगा हुआ करता था.
किन कलाकारों ने किया इस्तेमाल?

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नीले रंग का इस्तेमाल तब हर कोई नहीं कर सकता है. उस वक्त सिर्फ कुछ कलाकार ही नीले रंग का इस्तेमाल करते थे जैसे- लियोनार्डो दा विंची, माइकल एंजेलो या वर्मीर आदि. इन सभी ने अपनी पेंटिंग्स में इस नीले रंग का इस्तेमाल किया.
दिलचस्प तथ्य

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कहा जाता है कि इस पत्थर का इस्तेमाल मिस्र में गहनों और सजावट के लिए किया जाता था. इसे राजसी पत्थर के नाम से जाना जाता था. आज भी असली अल्ट्रामरीन और लैपिस लाजुली का इस्तेमाल खास चीजों में किया जाता है.