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गर्मी आते ही मार्किट में चारों तरफ आम ही आम नजर आने लगते हैं. इसमें मालदा, हापुस लंगड़ा आदि कई तरह के आम आपने खाए होंगे. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर जब आम के न तो पैर है, तो एक आम की नसल का नाम लंगड़ा कैसे पड़ा? आइए जानते हैं.
गर्मियों में फिर बढ़ी लंगड़ा आम की मांग

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आम का मौसम शुरू होते ही बाजारों में कई किस्में दिखाई देने लगती हैं. दशहरी, चौसा और सफेदा के साथ लंगड़ा आम भी लोगों की पहली पसंद माना जाता है, इसका स्वाद खास है, लेकिन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है.
नाम सुनते ही लोगों के मन में उठता है सवाल

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बहुत से लोग सोचते हैं कि इतने मशहूर और स्वादिष्ट आम का नाम आखिर 'लंगड़ा' क्यों रखा गया. हालांकि, इस नाम के पीछे अलग-अलग शहरों में अलग-अलग कहानियां सुनने को मिलती हैं, जो इसे और रोचक बनाती हैं.
मुरादाबाद में सुनाई जाती है अलग कहानी

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मुरादाबाद की एक मान्यता के अनुसार, पुराने समय में देसी आम छोटे और कम वजन वाले होते थे. लोग उन्हें हाथ में थैले से ले जाते थे, लेकिन लंगड़ा आम ज्यादा भारी माना जाता था, बस यहीं से इसका लंगड़ा आम नाम पड़ गया.
कंधे पर उठाकर ले जाने से जुड़ा नाम

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कहा जाता है कि लंगड़ा आम इतना वजनदार होता था कि लोग उसे हाथ की बजाय कंधे पर रखकर ले जाते थे. ज्यादा वजन होने से चलने का अंदाज बदल जाता था, इसलिए इसका नाम लंगड़ा पड़ा.
आकार भी बड़ा खास

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यह आम चौड़ा होता है और बढ़ते समय इसमें आगे की तरफ उभरी हुई चोंच जैसी बनावट दिखती है.
गूदेदार स्वाद ने बनाया लोगों का पसंदीदा

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लंगड़ा आम सिर्फ नाम से नहीं, स्वाद से भी खास पहचान रखता है. इसमें गूदा भरपूर होता है और स्वाद मीठा व खुशबूदार माना जाता है. इसी वजह से हर साल इसकी मांग काफी बढ़ जाती है.
हर शहर में अलग कहानी, नाम वही मशहूर

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लंगड़ा आम के नाम को लेकर अलग-अलग जगहों पर अलग मान्यताएं मिलती हैं. कहीं इसे वजन से जोड़ा जाता है तो कहीं आकार से. लेकिन इतना तय है कि यह नाम आज बेहद मशहूर बन चुका है. (Image: Pexels/AI)