शरीर को 'उबाल' देने वाली गर्मी! क्या है Wet Bulb Limit, जिसके पार इंसान जिंदा नहीं रह सकता?

What Is Wet bulb Temperature: वेट बल्ब लिमिट हमें यह याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि इंसानी जीवन के लिए सीधा खतरा बनता जा रहा है. ऐसे में यहां जानिए क्या है यह वेट बल्ब तापमान और भारत पर इसका खतरा ज्यादा क्यों है.

What Is Wet Bulb
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What Is Wet Bulb

What Is Wet Bulb Limit: गर्मी सिर्फ तापमान से खतरनाक नहीं बनती बल्कि हवा में मौजूद नमी उसे जानलेवा बना सकती है. यही वजह है कि कई बार 40 डिग्री तापमान भी सहन हो जाता है, लेकिन 35-36 डिग्री के साथ उमस इंसान की हालत बिगाड़ देती है. इसी खतरनाक स्थिति को समझने के लिए वैज्ञानिक एक खास पैमाना इस्तेमाल करते हैं जिसे “वेट बल्ब तापमान” (Wet Bulb Temperature) कहा जाता है. जानिए वेट बल्ब तापमान का भारत पर क्या होगा असर.

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क्या है वेट बल्ब तापमान

क्या है वेट बल्ब तापमान 2 / 7

साधारण तापमान सिर्फ यह बताता है कि हवा कितनी गर्म है, लेकिन वेट बल्ब तापमान यह मापता है कि गर्मी और नमी मिलकर शरीर पर कितना असर डाल रही हैं. जब हवा में बहुत ज्यादा नमी होती है, तब पसीना जल्दी नहीं सूखता. यही सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि इंसानी शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीने पर निर्भर करता है.

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कितना वेट बल्ब तापमान खतरनाक है

कितना वेट बल्ब तापमान खतरनाक है 3 / 7

वैज्ञानिकों के अनुसार अगर वेट बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो इंसान के लिए लंबे समय तक जिंदा रहना बेहद मुश्किल हो सकता है. इसे ही Wet Bulb Limit कहा जाता है. इस स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता और धीरे-धीरे अंदरूनी तापमान बढ़ने लगता है. इससे हीट स्ट्रोक, अंगों के फेल होने और मौत तक का खतरा पैदा हो सकता है.

भारत पर भी मंडराने लगा है खतरा

भारत पर भी मंडराने लगा है खतरा 4 / 7

सबसे डरावनी बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्से इस वेट बल्ब सीमा के करीब पहुंचने लगे हैं. भारत, पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के कुछ इलाके पहले ही ऐसी खतरनाक गर्मी का अनुभव कर चुके हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दशकों में ऐसी हीटवेव और ज्यादा आम हो सकती हैं.

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भारत के लिए बुरी स्थिति

भारत के लिए बुरी स्थिति 5 / 7

भारत में स्थिति इसलिए गंभीर मानी जाती है क्योंकि यहां बड़ी आबादी खुले में काम करती है. मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस और डिलीवरी कर्मी जैसे लोग घंटों धूप और उमस में रहते हैं. अगर वेट बल्ब तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए तो सिर्फ छांव में बैठना भी पर्याप्त नहीं होगा.

शरीर जलने लगता है

शरीर जलने लगता है 6 / 7

2024 और 2025 की कई हीटवेव के दौरान भारत के कुछ शहरों में लोगों ने “ऐसा लग रहा है जैसे शरीर जल रहा हो” जैसी शिकायतें की हैं. यही वेट बल्ब प्रभाव का असली उदाहरण है. शरीर लगातार पसीना बहाता है लेकिन नमी के कारण वह सूख नहीं पाता और शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता.

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खुद को गर्मी से बचाए रखने के लिए क्या करें

खुद को गर्मी से बचाए रखने के लिए क्या करें 7 / 7

गर्मी या वेट बल्ब तापमान से बचने के लिए सिर्फ पानी पीना काफी नहीं है. विशेषज्ञ हल्के कपड़े पहनने, धूप में कम निकलने, लगातार हाइड्रेटेड रहने और उमस वाले दिनों में भारी काम से बचने की सलाह देते हैं. एयर कंडीशनिंग या ठंडी हवा वाले स्थान भी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बचाने वाले साबित हो सकते हैं. यह भी पढ़ें -AC चलाने के ये 5 हैक्स जान लिए तो बिल्कुल नहीं लगेगी गर्मी, रात में आएगी चैन की नींद

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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