What Is Wet Bulb Limit: गर्मी सिर्फ तापमान से खतरनाक नहीं बनती बल्कि हवा में मौजूद नमी उसे जानलेवा बना सकती है. यही वजह है कि कई बार 40 डिग्री तापमान भी सहन हो जाता है, लेकिन 35-36 डिग्री के साथ उमस इंसान की हालत बिगाड़ देती है. इसी खतरनाक स्थिति को समझने के लिए वैज्ञानिक एक खास पैमाना इस्तेमाल करते हैं जिसे “वेट बल्ब तापमान” (Wet Bulb Temperature) कहा जाता है. जानिए वेट बल्ब तापमान का भारत पर क्या होगा असर.
क्या है वेट बल्ब तापमान

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साधारण तापमान सिर्फ यह बताता है कि हवा कितनी गर्म है, लेकिन वेट बल्ब तापमान यह मापता है कि गर्मी और नमी मिलकर शरीर पर कितना असर डाल रही हैं. जब हवा में बहुत ज्यादा नमी होती है, तब पसीना जल्दी नहीं सूखता. यही सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि इंसानी शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीने पर निर्भर करता है.
कितना वेट बल्ब तापमान खतरनाक है

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वैज्ञानिकों के अनुसार अगर वेट बल्ब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो इंसान के लिए लंबे समय तक जिंदा रहना बेहद मुश्किल हो सकता है. इसे ही Wet Bulb Limit कहा जाता है. इस स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता और धीरे-धीरे अंदरूनी तापमान बढ़ने लगता है. इससे हीट स्ट्रोक, अंगों के फेल होने और मौत तक का खतरा पैदा हो सकता है.
भारत पर भी मंडराने लगा है खतरा

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सबसे डरावनी बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्से इस वेट बल्ब सीमा के करीब पहुंचने लगे हैं. भारत, पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के कुछ इलाके पहले ही ऐसी खतरनाक गर्मी का अनुभव कर चुके हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दशकों में ऐसी हीटवेव और ज्यादा आम हो सकती हैं.
भारत के लिए बुरी स्थिति

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भारत में स्थिति इसलिए गंभीर मानी जाती है क्योंकि यहां बड़ी आबादी खुले में काम करती है. मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस और डिलीवरी कर्मी जैसे लोग घंटों धूप और उमस में रहते हैं. अगर वेट बल्ब तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए तो सिर्फ छांव में बैठना भी पर्याप्त नहीं होगा.
शरीर जलने लगता है

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2024 और 2025 की कई हीटवेव के दौरान भारत के कुछ शहरों में लोगों ने “ऐसा लग रहा है जैसे शरीर जल रहा हो” जैसी शिकायतें की हैं. यही वेट बल्ब प्रभाव का असली उदाहरण है. शरीर लगातार पसीना बहाता है लेकिन नमी के कारण वह सूख नहीं पाता और शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता.
खुद को गर्मी से बचाए रखने के लिए क्या करें

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गर्मी या वेट बल्ब तापमान से बचने के लिए सिर्फ पानी पीना काफी नहीं है. विशेषज्ञ हल्के कपड़े पहनने, धूप में कम निकलने, लगातार हाइड्रेटेड रहने और उमस वाले दिनों में भारी काम से बचने की सलाह देते हैं. एयर कंडीशनिंग या ठंडी हवा वाले स्थान भी ऐसी परिस्थितियों में जीवन बचाने वाले साबित हो सकते हैं.
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