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अक्सर लोगों का सवाल रहता है कि आखिर जब कोई शख्स मर जाता है, तो उसके कान और नाक में रूई क्यों डाली जाती है? आइए हम आपको आसान शब्दों में बताते हें इसको लेकर क्या कहता है विज्ञान और ये क्यों जरूरी है?
दुनिया की असल सच्चाई

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मौत इंसान की वह सच्चाई है, जिससे पीछा छुड़ाने के लिए वह जितनी तेजी से भागता है, उतनी ही तेजी से मौत उसके पीछे भागती है और वक्त पूरा होते ही दुनिया से उसका सफर खत्म कर देती है.
सारी दौलत, रंगीन कपड़े रह जाते हैं धरे

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इंसान जब जिंदा रहता है, तो वह तरह-तरह के कपड़े पहनता है. लेकिन जब इंसान की मौत हो जाती है, उसके पास सिर्फ सफेद चादर और नाक और कान में रूई रह जाती है. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि आखिर रूई का इस्तेमाल क्यों होता है?
धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दलीलें

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रूई लगाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण अलग-अलग है. अक्सर लोग मानते हैं कि मरने के बाद व्यक्ति के शरीर में हवा प्रवेश करती है, तो उसे रोकना जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह शरीर को भारी कर सकती है.
क्या कहता है विज्ञान?

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रूई लगाने को लेकर वैज्ञानिकों कहना है कि जब किसी की मौत होती है, तो उसके शरीर के अंदर मौजूद तरह-तरह के बैक्टीरिया न जाए और न ह बाहर आए, उसके रोकने के लिए रूई का इस्तेमाल होता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि मरने के बाद व्यक्ति के नाक से एक द्रव निकलता है जिसे रोकने के लिए भी रूई लगाई जाती है.
क्या है धार्मिक वजह

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इसके पीछे धार्मिक कारण है ये है कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति देने के लिए मृत शरीर के खुले हुए हिस्सों में सोने के टुकड़े (तुस्स) रखे जाते है ऐसे में नाक और कान का छेद बड़ा होता है, ऐसे में सोना गिर सकता है, इसलिए रूई से बंद कर दिया जाता है.
क्या मृत व्यक्ति को सुनाई आ जाती है आवाज?

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अक्सर लोग सोचते हैं कि मृत व्यक्ति की शरीर को मरने के बाद आसपास की आवाज न सुनाई दे और ना ही किसी तरह की बदबू बाहर ना आए इसके लिए रूई नाक और कान में लगाई जाती है. लेकिन आवाज को लेकर रिसर्च बताती हैं कि मौत के 2 मिनट के बाद तक मृत शरीर को आवाज सुनाई आ सकती है. (Image: Pexels)