DK Shivkumar Networth: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री होंगे. उनकी नेटवर्थ जानकर चौंक जाएंगे. चुनावी हलफनामे के अनुसार डीके शिवकुमार के पास 244 करोड़ रुपए की चल संपत्ति है. परिवार को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 273 करोड़ तक पहुंच जाता है. उनके और परिवार के खाते में कुल 16 करोड़ से ज्यादा जमा है.
970 करोड़ रुपए की संपत्ति

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अगर अचल संपत्ति की बात करें तो केवल डीके शिवकुमार के पास 970 करोड़ रुपए की संपत्ति है. वहीं, परिवार समेत डीके के पास 1140 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी है. इतना ही नहीं, डीके और उनकी पत्नी के नाम 30 करोड़ रुपए के खेत हैं. साथ ही दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक उनके पास कई घर हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 84 करोड़ रुपए बताई गई है.
कॉमर्शियल प्रॉपर्टीज के भी मालिक

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इसके अलावा डीके शिवकुमार के पास कॉमर्शियल प्रॉपर्टीज भी कई हैं. इसमें दुकान आदि शामिल हैं. हलफनामे के मुताबिक उनके पास ग्लोबल मॉल है जो तकरीबन 900 करोड़ रुपए का है. इसके अलावा परिवार के नाम पर भी कई दुकानें और अन्य प्रॉपर्टीज हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करोड़ों रुपए में है. शेयर मार्केट में भी डीके शिवकुमार ने अच्छा-खासा इनवेस्ट कर रखा है. विभिन्न कंपनियों के शेयरों में उन्होंने और उनकी पत्नी ने करोड़ों रुपए लगा रखे हैं. वहीं, 9 करोड़ रुपए की एफडी भी उनके नाम है. ज्वैलरी की बात करें तो डीके शिवकुमार, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम 3.2 करोड़ से ज्यादा के आभूषण हैं. यह सारी जानकारी डीके शिवकुमार के साल 2023 विधानसभा चुनाव के हलफनामे में दी गई है.
सियासी सफर भी बेहद शानदार रहा

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डीके का सियासी सफर भी बेहद रोचक रहा. जब उनकी उम्र मात्र 23 साल थी, तभी वह एचडी देवगौड़ा के खिलाफ सथनूर सीट पर चुनावी मैदान में उतर गए थे. यह साल था और 1985. हालांकि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने गए डीके को यहां पर हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन अपने जुझारूपन की बदौलत वह शीर्ष नेतृत्व की नजरों में आ चुके थे. साल 1989 में डीके दोबारा इसी सीट से चुनाव लड़े और जीते थे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह अब तक कुल 8 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं.
डीके शिवकुमार का कहां हुआ जन्म

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डीके शिवकुमार का जन्म 15 मई 1962 को कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा तालुक के अंतर्गत आने वाले दोड्डआलाहल्ली' गांव में हुआ. उनका परिवार वोक्कालिगा समुदाय से जुड़ा है. कर्नाटक की राजनीति में इस समुदाय का काफी दबदबा है. डीके ने अपनी पढ़ाई-लिखाई बेंगलुरु से ही की है. पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव सियासत की तरफ हो गया. 1980 के दशक में उनका जुड़ाव कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से हुआ. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.