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दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारी कर्ज के बोझ तले दबती जा रही हैं. कुछ देशों का कर्ज उनकी GDP से कई गुना ज्यादा हो चुका है. आइए जानते हैं दुनिया के 7 सबसे ज्यादा कर्जदार देशों के बारे में और उन पर कितना कर्ज है.
कर्ज क्यों बन रहा है ग्लोबल टेंशन?

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आज दुनिया की लगभग हर बड़ी इकोनॉमी कर्ज पर डिपेंड हो चुकी है. सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, शिक्षा और आर्थिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर उधार लेती हैं. लेकिन जब ये कर्ज देश की कुल आर्थिक क्षमता (GDP) से ज्यादा हो जाता है, तो खतरा बढ़ जाता है. ज्यादा कर्ज का मतलब है ब्याज का बढ़ता बोझ, जिससे सरकारों के पास डेवलेपमेंट के लिए कम पैसा बचता है. यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता कर्ज अब एक बड़ी आर्थिक चिंता बन चुका है.
अमेरिका

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अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसका कर्ज भी बेहद बड़ा है. यहां सरकारी खर्च, रक्षा बजट, सामाजिक योजनाएं और टैक्स कटौती जैसी नीतियों की वजह से कर्ज लगातार बढ़ा है. US पर करीब 38.27 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है. अमेरिका का फायदा ये है कि डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी है, जिससे उसे कर्ज लेने में आसानी होती है.
चीन

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चीन तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन इसके साथ कर्ज भी बढ़ रहा है. इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर चीन है, जिस पर लगभग 18.6 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है.
जापान

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चीन के बाद बारी आती है जापान की, जिसपर करीब 9.8 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है. यहां सरकारी खर्च और बुजुर्ग आबादी की वजह से कर्ज लगातार बढ़ा है.
यूनाइटेड किंगडम

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ब्रिटेन भी भारी कर्ज वाले देशों की सूची में शामिल है. आर्थिक उतार-चढ़ाव, ब्रेक्सिट और सरकारी खर्च की वजह से यहां कर्ज बढ़ा है. सरकार लगातार इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है.
फ्रांस और इटली

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यूनाइटेड किंगडम के बाद फ्रांस और इटली का नंबर आता है. दोनों देशों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है. इटली में आर्थिक बढ़ोतरी धीमी है और सरकारी खर्च ज्यादा, जिसकी वजह से वो कर्ज से परेशान है.
भारत

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भारत इस लिस्ट में 7वें नंबर पर शामिल है, हालांकि बाकी बड़े देशों की तुलना में इसका कर्ज कम है. भारत पर कुल कर्ज करीब 3.36 ट्रिलियन डॉलर है.
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