आपने भी कभी न कभी चीन को ड्रैगन कहते हुए जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीन कोई अकेला देश नहीं है जिसकी ऐसी कोई प्रतीकात्मक पहचान है. चीनी सभ्यता में ड्रैगन का डर का प्रतीक नहीं है बल्कि एकता, समृद्धि और दैवीय सत्ता का एक शक्तिशाली प्रतीक है. तो चलिए आज हम जानते हैं कि आखिर चीन का नाम ड्रैगन कैसे पड़ा.
ड्रैगन की संतान

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चीन के लिए ड्रैगन शब्द कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है बल्कि यह एक गहरी जड़ें जमा चुकी एक बेहद पुरानी सांस्कृतिक पहचान है. सदियों से चीनी लोग खुद को ड्रैगन की संतान कहते आए हैं.
चीन के लोगों ने बनाया मिश्रित प्रतीक

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परंपरा के अनुसार, सम्राट हुआंग डी ने अलग-अलग कबीलों को एकजुट किया और उनके प्रतीकों को मिलाकर एक मिश्रित प्रतीक बनाया. यह एकीकृत आकृति बाद में ड्रैगन के रूप में विकसित हो गई.
प्राचीन चीन में सम्राटों से जुड़ा था ड्रैगन

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प्राचीन चीन में ड्रैगन सम्राटों से गहराई से जुड़ा हुआ था. वे खुद को दैवीय शासक मानते थे. यह शाही पोशाकों और महलों पर दिखाई देता था.
चीनी संस्कृति में ड्रैगन के मायने

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ड्रैगन को विनाशकारी जीव के रूप में चित्रित करने वाली पश्चिम धारणाओं के विपरीत चीनी संस्कृति में ड्रैगन, ज्ञान, समृद्धि, सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक है. इससे यह पूजनीय बन जाता है.
भारत हाथी और जापान उगते सूरज की भूमि

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बता दें कि भूटान-थंडर ड्रैगन की भूमि, भारत-हाथी और जापान- उगते सूरज की भूमि कहलाए जाते हैं. ये उपाधि आधिकारिक नहीं होती है बल्कि यह दर्शाती है कि देश को ऐतिहासिक और वैश्विक स्तर पर किसी नजर से देखा जाता है.