2 कूबड़ वाले ऊंटों पर ही गश्त क्यों करते हैं सेना के जवान? रेगिस्तान में रहने वालों को भी नहीं पता होगा जवाब

भारत की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी भारतीय सेना की है। जम्मू-कश्मीर, गुजरात, राजस्थान और पंजाब में पाकिस्तान के अलावा भारत की सीमा अति दुर्गम स्थल लद्दाख में चीन से भी लगती है, जहां 24 घंटे सेना की जवानों की गश्त होती है, आइए जानते हैं कैसे?

two humped camels
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लद्दाख देश का सबसे दुर्गम और सबसे ठंडा पहाड़ी स्थल है। यहां ठंड के मौसम में माइनस 30 डिग्री तापमान चला जाता है। वहीं यहां अकसर ठंड के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इस मौसम में भी सेना के जवाब बॉर्डर पर गश्त करते हैं और इस मुश्किल काम में उनका साथ 2 कूबड़ वाले ऊंट देते हैं।

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कहां पाए जाते हैं 2 कूबड़ वाले ऊंट

कहां पाए जाते हैं 2 कूबड़ वाले ऊंट2 / 5

जी हां, रेगिस्तान में ऊंट की सवारी की है, लेकिन भारत के लद्दाख में नुब्रा घाटी के हुंडर गांव में पाए जाते हैं। भारत के अलावा मध्य एशिया के ठंडे रेगिस्तानी देशों जैसे मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी पाए जाते हैं। इन 2 कूबड़ वाले ऊंटों पर सवार होकर भी सेना के जवान भारत-चीन बॉर्डर की रक्षा सकते हैं।

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सेना में क्या हैं 2 कूबड़ वाले ऊंट

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भारत-चीन सीमा की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले 2 कूबड़ वाले ऊंटों को डबल हंप्ड या फिर बैक्ट्रियन ऊंट कहते हैं। इनके 2 कूबड़ ही उन्हें रेगिस्तान में पाए जाने वाले ऊंटों से अलग बनाते हैं। क्योंकि 2 कूबड़ वाले ऊंट लद्दाख के -40°C तापमान में भी आसानी से सांस ले सकते हैं और बर्फीले, पथरीले और संकरे रास्तों आसानी से चल सकते हैं, इसलिए भारतीय सेना के द्वारा पेट्रोलिंग के लिए इन्हें इस्तेमाल किए जाते हैं।

2 कूबड़ वाले ऊंट की खासियतें

2 कूबड़ वाले ऊंट की खासियतें4 / 5

2 कूबड़ वाले ऊंटों की खासियत उनकी सहनशक्ति हैं। लद्दाख को कोल्ड डेजर्ट कहा जाता है। वहां इंसान तो क्या मशीनें तक हांफ जाती हैं, लेकिन 2 कूबड़ वाले ऊंट कम ऑक्सीजन में भी आसानी से सांस लेते हैं। इनकी मोटी फर, मजबूत टांगें और शरीर में फैट जमा करने की क्षमता अन्य खासियतें हैं। इनके शरीर के घने बाल इन्हें ठंड से बचाते हैं और 2 कूबड़ में वे फैट जमा करने में सक्षम होते हैं।

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2 कूबड़ वाले ऊंटों का इस्तेमाल

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बता दें कि 2 कूबड़ वाले ऊंट 15000 से 18000 फीट की ऊंचाई तक चढ़ने में सक्षम होते हैं। वहीं 150 से 200 किलो वजन उठाकर चढ़ाई कर सकते हैं। इसलिए भारतीय सेना के जवान गश्त करने के अलावा सामान को इधर से उधर ले जाने के लिए भी इन्हें इस्तेमाल कर करते हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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