राम मंदिर में लागू होगा 'नो-पॉकेट' ड्रेस कोड? जानें भारत के किन-किन मंदिरों में पहले से है ड्रेस कोड का नियम

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए एक नया नियम लागू करने की योजना बनाई जा रही है. इस नए नियम को नो पॉकेट ड्रेस कोड कहा जा रहा है.

ram mandir dress code
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पर्यटकों के लिए नहीं है ये नियम

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नई ड्रेस कोड राम मंदिर आने वाले तीर्थ यात्रियों या फिर पर्यटकों के लिए नहीं है. इसके बजाय यह नियम सिर्फ उन बैंकों और आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों पर लागू होता है जो दान में मिले कैश, गहनों और दूसरी कीमती सामानों की गिनती के लिए जिम्मेदार हैं. सिर्फ गिनती की प्रक्रिया से सीधे जुड़े कर्मचारियों को ही इन नए नियमों का पालन करना होगा.

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बिना जेब वाली यूनिफॉर्म ही होगी अनिवार्य

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अब अयोध्या राम मंदिर में बिना जेब वाली खास यूनिफॉर्म का नियम एक सबसे बड़ा बदलाव है. इस नए नियम के मुताबिक दान की गिनती वाले हॉल में जाने वाले हर कर्मचारी को गहरे नीले रंग की ड्रेस या फिर गाउन पहनना होगा जिसमें कोई भी जेब ना हो. इस कदम का मकसद मंदिर के दान को संभालते समय कपड़ों के अंदर नोट या फिर कीमती सामान छिपाने की किसी भी संभावना को खत्म करना है.

दो स्तरीय सुरक्षा और जांच

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गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा इंतजाम भी काफी कड़े कर दिए गए हैं. कर्मचारियों की अब दो चरणों में शारीरिक तलाशी ली जाती है. एक बार हॉल में घुसते समय गिनती होती है और दूसरी बार जब वहां से निकल रहे हों तब भी. इस दो स्तरीय सुरक्षा जांच का मकसद इस बात को पक्का करना है कि कड़ी सुरक्षा वाले गिनती क्षेत्र में कोई भी अनऑथराइज्ड चीज ना आए और ना ही वहां से बाहर जाए.

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निजी सामानों पर रोक

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ट्रस्ट ने गिनती वाले कमरे में निजी सामान ले जाने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. कर्मचारियों को हॉल के अंदर मोबाइल फोन, वॉलेट, कैमरा, बैग, चाबी या फिर कोई दूसरा निजी सामान ले जाने की इजाजत नहीं है. इन सब के अलावा गिनती क्षेत्र में जाने से पहले जूते चप्पल उतारने होंगे. इसके साथ ही अब कर्मचारी टेबल-कुर्सी पर बैठने के बजाय जमीन पर बैठकर कैश और कीमती सामानों की गिनती करेंगे. मिली जानकारी के मुताबिक गिनती की प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए यह अतिरिक्त उपाय लागू किया गया है.

भारत के किन मंदिरों में पहले से लागू है स्पेशल ड्रेस कोड

भारत के किन मंदिरों में पहले से लागू है स्पेशल ड्रेस कोड6 / 9

बता दें कि नो पॉकेट ड्रेस कोड नियम सिर्फ मंदिर के कर्मचारियों पर लागू होता है भक्तों पर नहीं और ये नियम कोई नया नियम नहीं है. अयोध्या राम मंदिर में लागू होने से पहले भी ये नियम भारत के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में लागू होता है.

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दक्षिण भारतीय मंदिरों में सबसे सख्त ड्रेस कोड

दक्षिण भारतीय मंदिरों में सबसे सख्त ड्रेस कोड 7 / 9

देश के कुछ सबसे सख्त ड्रेस नियम दक्षिण भारत में देखने को मिलते हैं. केरल के श्री पद्मनखभस्वामी मंदिर में पुरुषों को सिर्फ पारंपरिक धोती या फिर मुंडू पहनना होता है. साथ ही अंदर जाने से पहले शर्ट या फिर कुर्ता उतरना पड़ता है. ऐसा इसलिए ताकि शरीर का ऊपरी हिस्सा खुला रहे. महिलाओं को साड़ी या फिर पारंपरिक लहंगा पहनना होता है. यहां पर सलवार सूट आमतौर पर स्वीकार नहीं किए जाते.

गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में भी पारंपरिक ड्रेस कोड

गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में भी पारंपरिक ड्रेस कोड8 / 9

गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में भी पारंपरिक ड्रेस कोड का पालन होता है. पुरुषों को सिर्फ कमर के चारों तरफ बंधी मुंडू या फिर लुंगी में प्रवेश करने की अनुमति है. इसी के साथ महिलाओं को साड़ी या फिर सलवार सूट पहनना पड़ता है.

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तिरुपति बालाजी मंदिर में धोती कुर्ता या पजामा

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आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में पुरुषों को धोती कुर्ता या फिर पजामा पहनना होता है. इसी के साथ महिलाओं को दुपट्टे के साथ साड़ी या फिर चूड़ीदार सलवार सूट पहनना होता है. शॉर्ट्स, जींस, टी-शर्ट और बाकी पश्चिमी कैजुअल कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती या फिर जलाभिषेक में भाग लेने वाले भक्तों को तय ड्रेस कोड का पालन करता होता है. पुरुषों को धोती के साथ सोला पहनना पड़ता है और महिलाओं को साड़ी पहननी पड़ती है. महाराष्ट्र के संभाजी नगर में स्थित घृष्णेश्वर महादेव मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां पर पुरुषों को गर्भ गृह में प्रवेश करने से पहले शरीर के ऊपरी हिस्से के सभी कपड़े उतारने होते हैं. इसी के साथ द्वारकाधीश मंदिर में भी नोटिस लगाए गए हैं जिनमें आने वालों को बताया गया है कि मंदिर पूजा का स्थान है फैशन का नहीं. यहां पर शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट, फटी हुई जींस, नाइट सूट और इस तरह के कपड़े पहनने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाता.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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