Petrol Price Hike: आखिरी बार पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 महंगा होने से पूरे भारत में आम नागरिकों की जेब का बोझ बढ़ा दिया है. क्या आप जानते हैं कि अगर रात भर पेट्रोल या फिर डीजल फ्यूल स्टेशन में बचा रहे और अगली सुबह कीमत बढ़ जाए तो यह अतिरिक्त पैसा कौन कमाता है. पंप मालिक या कंपनी? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब...
तेल कंपनी पर ज्यादा असर नहीं

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एक बार जब फ्यूल डीलर को बेच दिया जाता है तो तेल कंपनी पर उस स्टॉक की खुदरा कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता. पेट्रोल पंप के मालिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पैट्रोलियम जैसी कंपनियों से फ्यूल का भुगतान पहले से करके खरीदते हैं.
बढ़ोतरी का सीधा फायदा पंप के मालिक को

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एक बार जब फ्यूल जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंक में पहुंचा दिया जाता है तो उसका मालिकाना हक पूरी तरह से डीलर के पास चला जाता है. इसका मतलब है कि कीमतों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का सीधा फायदा पंप के मालिक को मिलता है. तेल कंपनी की कमाई मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफायनिंग मार्जिन, परिवहन लागत और सरकारी टैक्स नीति पर निर्भर करती है.
इन्वेंटरी गेन और इन्वेंटरी लॉस

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अगर अगली सुबह फ्यूल की कीमत बढ़ जाती है तो पंप पर पहले से जमा मौजूद स्टॉक नई और बढ़ी हुई दर पर बेचा जाता है. इस अंतर से होने वाली अतिरिक्त कमाई को इन्वेंटरी गेन कहा जाता है. वहीं, कीमत में कटौती के दौरान यह सिस्टम ठीक उल्टा काम करता है. अगर रात भर में पेट्रोल या फिर डीजल की कीमत कम हो जाती है तो डीलरों को पहले से ज्यादा कीमत पर खरीदा हुआ फ्यूल अगले दिन कम दर पर बेचना पड़ता है. इसे इन्वेंटरी लॉस कहा जाता है.
कमाई का एक जरिया ये भी

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आम दिनों में जब कीमत स्थिर रहती है तो पेट्रोल पंप के मालिक सिर्फ फ्यूल बेचने से ही काफी ज्यादा मुनाफा नहीं कमाते. उनकी मुख्य कमाई एक तय डीलर कमीशन से होती है. यह आमतौर पर पेट्रोल पर ₹3 से ₹4.50 प्रति लीटर और डीजल पर ₹2.50 से ₹3.50 प्रति लीटर होता है. डीलर को मिलने वाला कमीशन पूरी तरह से मुनाफा नहीं होता. पंप मालिक को इस कमाई का इस्तेमाल कर्मचारियों की सैलरी, बिजली के बिल, मशीन के रखरखाव, सिक्योरिटी सिस्टम और रोजाना के खर्चे को पूरा करने के लिए करना पड़ता है.