जब इजरायल-भारत मिलकर खत्म करने चले थे पाकिस्तान का 'इस्लामिक बम', तब इंदिरा गांधी की 'ना' से टल गया था हमला

साल 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में अपना एक हिस्सा गंवाने के बाद सत्ता संभालने वाले पाकिस्तान के वजीर-ए-आला जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक वक्त में ये ऐलान किया था कि भारत से 100 साल जंग लड़ेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि घास फूस खाकर भी भारत के खिलाफ पाकिस्तान परमाणु बम जरूर बनाएगा. भुट्टो ने कहा था कि पहले से ही एक ईसाई बम है, एक यहूदी बम है और अब एक हिंदू बम भी है, तो फिर एक इस्लामी बम क्यों नहीं?

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साल 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में अपना एक हिस्सा गंवाने के बाद सत्ता संभालने वाले पाकिस्तान के वजीर-ए-आला जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक वक्त में ये ऐलान किया था कि भारत से 100 साल जंग लड़ेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि घास फूस खाकर भी भारत के खिलाफ पाकिस्तान परमाणु बम जरूर बनाएगा. भुट्टो ने कहा था कि पहले से ही एक ईसाई बम है, एक यहूदी बम है और अब एक हिंदू बम भी है, तो फिर एक इस्लामी बम क्यों नहीं?

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भारत और इजरायल ने मिलाए थे हाथ

भारत और इजरायल ने मिलाए थे हाथ2 / 7

इसके एक दशक से भी कम समय बाद, 1980 के दशक की शुरुआत में, उन शब्दों और उनके नतीजों के चलते इजरायल और भारत ने हाथ मिला लिए, जबकि उस समय दोनों देशों के बीच पूरे राजनयिक संबंध भी नहीं थे. आखिर, दोनों ही देश पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान के दो कट्टर रणनीतिक दुश्मन थे, और आज भी हैं. भारत और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध तो इसके एक दशक बाद, 1992 में प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में ही स्थापित हुए थे.

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तीनों देश उलझे थे कोवर्ट ऑपरेशन में

तीनों देश उलझे थे कोवर्ट ऑपरेशन में3 / 7

भारत, इजरायल और पाकिस्तान- ये सभी अब परमाणु शक्तियां हैं लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब तीनों कोवर्ट ऑपरेशन में उलझ गए थे. इजरायल को डर था कि पाकिस्तान इस्लामिक बम हासिल करने के बेहद करीब है. बम को लेकर इजरायल का डर इतना गहरा था कि उसने भारत के साथ मिलकर एक संयुक्त गुप्त हमले की योजना बनाई थी.

आखिर इंदिरा गांधी ने क्यों किया था मना?

आखिर इंदिरा गांधी ने क्यों किया था मना?4 / 7

लेकिन, फिर, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आखिरी चरण में इस ऑपरेशन को रद्द कर दिया. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की धमकियों के आगे इंदिरा "घबरा गईं". पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु बम हासिल कर लिया और, इसने दक्षिण एशिया को बदल दिया, और अब मध्य पूर्व पर भी इसकी छाया पड़ रही है. पाकिस्तान परमाणु हथियार रखने वाला एकमात्र इस्लामिक देश है.

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जब इजरायल ने भारत को दिया था ऑफर

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जब पाकिस्तान में परमाणु हथियार बनाए जा रहे थे ठीत उसी समय भारत को एक बहुत बड़ा ऑफर मिला था. उस दौरान इजराइल ने कहा था कि संयुक्त रूप से मिलकर ऑपरेशन चलाया जाए और पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया जाए. जैसे कि इन दिनों इजरायल ईरान के साथ कर रहा है. लेकिन उस वक्त भारत सरकार पीछे हट गई थी. दरअसल, 1980 के दशक में इजराइल ने भारत को यह ऑफर दिया था.

रॉ के पास थी खूफिया सटीक जानकारी

रॉ के पास थी खूफिया सटीक जानकारी6 / 7

इसके अलावा 1980 के दशक में रॉ के पास ठोस खुफ़िया जानकारी पूरी तरीके से थी. इजरायल संयुक्त रूप से पाकिस्तान पर हमले के लिए तैयार था. जामनगर एयरबेस को संभावित लॉन्चपड के रूप में चुना गया था और यहीं से ऑपरेशन किया जाना था. भारतीय सेना ने हवाई हमले के लिए पूरा समर्थन भी दे दिया था. फिर भी सरकार पीछे हटी. भारत के पास खतरे को पहले ही खत्म करने का मौका था और आज पाकिस्तान के पास खुद का परमाणु हथियार नहीं होता. ऐसा भी कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने अंतरराष्ट्रीय डर की वजह से अपने कदम पीछे हटाए थे. 1988 में राजीव गांधी ने बेनजीर भुट्टो के साथ नो स्ट्राइक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे.

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ट्रंप का पाकिस्तान पर अब्राहम समझौते के लिए दबाव

ट्रंप का पाकिस्तान पर अब्राहम समझौते के लिए दबाव7 / 7

अब 2026 में, कहूटा की वह कहानी फिर से प्रासंगिक हो गई है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान पर अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने और इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता देने के लिए दबाव डाल रहे हैं. ये समझौते, जिन्होंने इजरायल और मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के कई मुस्लिम-बहुल देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाया था, पाकिस्तान में लंबे समय से राजनीतिक रूप से विवादास्पद रहे हैं. इस्लामाबाद के लिए, इजरायल को मान्यता देना फिलिस्तीन के मुद्दे से जुड़ा रहा है. इजरायल के लिए, पाकिस्तान एक ऐसा इस्लामी देश बना हुआ है जिसके पास परमाणु हथियार हैं और जो उसे मान्यता नहीं देता.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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