
1 / 5
भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर का व्यापारिक समझौता एक ऐसी वजह से रुक गया है, जिसकी कल्पना शायद एक आम भारतीय ने कभी नहीं की होगी— 'नॉन-वेज' दूध. सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन भारत सरकार ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं.
आखिर क्या है यह 'नॉन-वेज' दूध?

2 / 5
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गाय-भैंसों को आमतौर पर घास, भूसा और खली खिलाई जाती है, जो पूरी तरह शाकाहारी होते हैं, लेकिन अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में पशुओं को 'ब्लड मील' खिलाया जाता है. यह चारा मरे हुए जानवरों के खून, मांस और हड्डियों के चूरे को सुखाकर तैयार किया जाता है. चूंकि दुधारू पशु यह मांसाहारी आहार लेते हैं, इसलिए भारत में इसे 'नॉन-वेज दूध' की श्रेणी में रखा जा रहा है.
क्यों खिलाया जाता है जानवरों को मांस?

3 / 5
वरिष्ठ पशु चिकित्सकों के अनुसार, अमेरिका जैसे देशों में पशुओं को मुख्य रूप से मांस के लिए पाला जाता है. मांसाहारी आहार देने से पशुओं के शरीर में मांस की मात्रा तेजी से बढ़ती है. वहां दूध एक बाई-प्रोडक्ट की तरह होता है, जिसे वे भारतीय बाजारों में बेचना चाहते हैं. लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है. भारत सरकार 'नॉन-वेज दूध' पर धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात की इजाजत नहीं देना चाहती है.
धार्मिक आस्था का सवाल

4 / 5
डॉक्टर राकेश कुमार शुक्ल कहते हैं कि भारत में गाय को 'गौमाता' का दर्जा प्राप्त है. दूध और घी का उपयोग न केवल भोजन में, बल्कि हर छोटे-बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है. ऐसे में 'ब्लड मील' खाकर तैयार होने वाले पशुओं का दूध भारतीय धार्मिक भावनाओं और संस्कृति के खिलाफ माना जा रहा है. सरकार के लिए करोड़ों लोगों की आस्था सर्वोपरि है. डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि यह डील जल्द ही अंतिम रूप लेने वाली है.
सेहत के लिए भी है बड़ा खतरा

5 / 5
विशेषज्ञों का कहना है कि मांसाहारी चारा खाने वाले पशुओं के दूध से BSE जैसी खतरनाक बीमारियां इंसानों तक पहुंच सकती हैं. इसके अलावा, 22% हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. अगर विदेशी डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोला गया, तो करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका पर भी संकट आ सकता है. फिलहाल, भारत अपनी इस शर्त पर अडिग है कि वह केवल उसी दूध को स्वीकार करेगा, जो पूरी तरह शाकाहारी चारा खाने वाले पशुओं से मिला हो।