भारत में NEET, पाकिस्तान में डाक्टर बनने के लिए कौन सा एग्जाम? कितने होते हैं पास?

भारत में नीट परीक्षा की सुरक्षा के लिए सेना की मदद लेने की तैयारी चल रही है, वहीं पाकिस्तान में डॉक्टर बनने की डगर भारत जितनी ही चुनौतीपूर्ण है, जहां केवल दाखिला लेना ही काफी नहीं है, बल्कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी अंतिम परीक्षा से गुजरना पड़ता है. सवाल है कि सरहद पार पाक में चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने की क्या प्रक्रिया है?

PAKISTAN DOCTOR
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भारत में इन दिनों पेपर लीक विवाद और मेडिकल की पढ़ाई सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. जहां भारत सरकार नीट परीक्षा के प्रश्नपत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सेना के हवाले करने जैसी सख्त योजना पर विचार कर रही है, वहीं पाकिस्तान में डाक्टर बनने के लिए कौन सा एग्जाम पास करना होना है और उसमें कितने छात्र हर साल पास होते हैं?

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पाकिस्तान में पास करना होता है MDCAT

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पाकिस्तान में डॉक्टर बनने के लिए भी कठिन परीक्षाएं पास करना अनिवार्य है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं. वहां डॉक्टर बनने की शुरुआत मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज एडमिशन टेस्ट यानी MDCAT से होती है. यह वहां की राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जो बिल्कुल भारत के नीट की तरह ही काम करती है.

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चिकित्सा शिक्षा की पहली सीढ़ी क्या?

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पाकिस्तान के किसी भी सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS या BDS (डेंटल) कोर्स के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है. MDCAT परीक्षा हर साल होती है. छात्रों के पास 12वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम होना जरूरी है. इंटरमीडिएट में न्यूनतम 60% अंक आवश्यक है. परीक्षा में कुल 180 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाते हैं, 3 घंटे का समय मिलता है. मुख्य रूप से बायोलॉजी, कैमेस्ट्री, फिजिक्स, अंग्रेजी और लॉजिकल रीजनिंग जैसे विषयों से सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती.

हर साल कितने छात्र होते हैं पास?

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प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (PMDC) की होती है. हर साल करीब 200,000 छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सरकारी कॉलेजों में MBBS की सिर्फ 4,000 के आसपास सीटें होने के कारण मुकाबला बेहद कड़ा होता है. सामान्य तौर पर पास होने के लिए MBBS में 55% और BDS में 50% अंक लाना जरूरी होता है, हालांकि हालिया सत्र में काउंसिल ने पासिंग मार्क्स में 3% की विशेष छूट देते हुए इसे क्रमशः 52% और 47% तक किया है. ऐसे में करीब 50,000 से 70,000 छात्र ही परीक्षा पास कर पाते हैं.

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कैसे मिलता डॉक्टरी का लाइसेंस?

कैसे मिलता डॉक्टरी का लाइसेंस?5 / 6

पाकिस्तान में केवल मेडिकल कॉलेज से डिग्री ले लेना ही डॉक्टर के रूप में काम करने की गारंटी नहीं देता. MBBS या BDS की पढ़ाई पूरी करने के बाद सभी ग्रेजुएट्स को नेशनल लाइसेंसिंग एग्जामिनेशन यानी NLE पास करना होता है. यह परीक्षा पाकिस्तान मेडिकल कमीशन (PMC) द्वारा आयोजित की जाती है. इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिग्री धारक छात्र व्यावहारिक रूप से मरीजों का इलाज करने और मेडिकल फील्ड में काम करने के लिए पूरी तरह से योग्य और कुशल है या नहीं.

विदेशी डिग्री होल्डर के लिए नियम समान

विदेशी डिग्री होल्डर के लिए नियम समान6 / 6

NLE परीक्षा पास करने के बाद ही किसी भी डॉक्टर को पाकिस्तान में कानूनी रूप से प्रैक्टिस करने का सरकारी लाइसेंस मिलता है. यह नियम केवल वहां के स्थानीय छात्रों पर ही लागू नहीं होता, बल्कि जो छात्र विदेशों से चिकित्सा की पढ़ाई (MBBS) पूरी करके पाकिस्तान लौटते हैं, उन्हें भी देश में डॉक्टर के रूप में काम करने के लिए इस लाइसेंसिंग परीक्षा को पास करना अनिवार्य होता है. इस दोहरे सुरक्षा चक्र के कारण ही पाकिस्तान में चिकित्सा पेशे की गुणवत्ता को नियंत्रित किया जाता है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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