मुगलों को कितनी पसंद थी शराब? देसी ताड़ी से लेकर शाही विदेशी वाइन तक क्या पीते थे बादशाह, किसने लगाया बैन

मुगल काल में शराब सिर्फ नशा नहीं बल्कि सामाजिक और शाही संस्कृति का हिस्सा थी. ताड़ी, महुआ से लेकर फारसी वाइन तक, जानिए उस दौर में कौन-कौन सी शराब बनती और पी जाती थी.

Mughal Era Alcohol
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Credit: AI

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मुगल काल में शराब की परंपरा

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मुगल काल में शराब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा थी. उस दौर में अमीर और गरीब दोनों वर्ग शराब का सेवन करते थे, हालांकि उनकी वैरायटी अलग होते थे. इतिहासकारों और विदेशी यात्रियों के मुताबिक, भारत में स्थानीय शराब के साथ-साथ विदेश से भी वाइन मंगाई जाती थी.

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ताड़ी

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ताड़ी मुगल काल की सबसे लोकप्रिय शराबों में से एक थी. ये ताड़ या नारियल के पेड़ों से निकले रस को नेचुरल तरीके से ferment करके बनाई जाती थी. ये सस्ती और आसानी से मिलती थी, इसलिए आम लोगों के बीच बहुत प्रचलित थी.

महुआ की शराब

महुआ की शराब4 / 10

महुआ के फूलों से बनने वाली शराब मध्य भारत और आदिवासी इलाकों में बेहद फेमस थी. इसे बनाने का प्रोसेस आसान था.  इसके लिए फूलों को सुखाकर पानी में सड़ाया जाता था. ये गरीब और मजदूर वर्ग के बीच खास पसंदीदा थी.

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सुरा

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चावल, जौ और बाजरे जैसे अनाज से बनने वाली ‘सुरा’ काफी मजबूत शराब मानी जाती थी. किसान और मजदूर इसे थकान दूर करने के लिए पीते थे. ये भारत की प्राचीन शराब परंपरा का हिस्सा थी, जो मुगल काल में भी जारी रही.  

अरक

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अरक एक खास प्रकार की distilled शराब थी, जिसे गुड़ या गन्ने से बनाया जाता था. इसमें सुगंध के लिए जड़ी-बूटियां भी मिलाई जाती थीं. ये ताड़ी से ज्यादा तेज और असरदार होती थी.

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फल और खजूर से बनी शराब

फल और खजूर से बनी शराब7 / 10

मुगल काल में आम, जामुन और बेर जैसे फलों से भी शराब बनाई जाती थी. इसके अलावा खजूर के रस से तैयार शराब भी कुछ इलाकों में लोगों को पसंद थी. हालांकि इनकी क्वालिटी विदेशी वाइन जैसी नहीं मानी जाती थी.

शाही दरबार में विदेशी वाइन का क्रेज

शाही दरबार में विदेशी वाइन का क्रेज8 / 10

मुगल बादशाहों और अमीरों को विदेशी शराब का खास शौक था. फारस (ईरान), काबुल और यूरोप से अंगूरी वाइन, ब्रांडी और रम आयात की जाती थी. शिराजी वाइन को सबसे बेहतरीन माना जाता था और ये शाही वैभव का प्रतीक थी.

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जहांगीर और शराब

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मुगल सम्राट जहांगीर को शराब का बेहद शौक था. उसके दरबार में वाइन पार्टियां आम थीं और विदेशी दूत भी शराब के उपहार लाते थे. अकबर के शासनकाल में शराब पर टैक्स लगाया गया था और इसकी दुकानों को शहर से बाहर रखने के नियम बनाए गए थे. इससे राज्य को राजस्व मिलता था और नियंत्रण भी बना रहता था.

औरंगजेब ने लगाया शराब पर बैन

औरंगजेब ने लगाया शराब पर बैन10 / 10

मुगल सम्राट औरंगजेब ने शराब पीने और बेचने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बावजूद चोरी-छिपे शराब का कारोबार चलता रहा, जिससे पता चलता है कि समाज में इसकी मांग बनी हुई थी.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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