मरने के बाद भी आवाजें सुन सकता है दिमाग? वैज्ञानिकों की खोज में चौंकाने वाला खुलासा

अकसर दिमाग में सवाल आता है कि जब कोई शख्स मर जाता है तो क्या उसके शरीर काम करना बंद देता है? इंसान के शरीर से सांस निकलते ही क्या सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं? इसका जवाब वैज्ञानिकों की एक रिसर्च दे रही है। आइए जानते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है?

Haridwar Cremation Ghat
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क्या इंसान का दिमाग मरने के बाद भी जिंदा रहता है? क्या वह जिंदा इसानों की बातें सुन सकता है? इसे लेकर वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की, जिसमें चौंका देने वाला सच पता चला। रिसर्च के अनुसार, क्लिनिकल डेथ यानी दिल की धड़कन बंद होने के बाद भी दिमाग पूरी तरह नहीं मरता, बल्कि उस दौरान वह एक जटिल प्रक्रिया से गुजरता है।

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जीवन का असली सच मृत्यु

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वैज्ञानिक कहते हैं कि जो जीवित है, वह मरेगा जरूर लेकिन मरने के साथ सबकुछ खत्म नहीं होता। जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो कुछ देर के लिए दिमाग जाग रहा होता है। इस दौरान वह अपने आस-पास के लोगों की बातें सुन रहा होता है। क्योंकि मौत एक पल में ही नहीं हो जाती, बल्कि यह धीरे-धीरे होने वाली एक प्रक्रिया है।

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दिल का रुकना पूर्ण मौत नहीं

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वैज्ञानिक कहते हैं कि दिल की धड़कन रुकते ही इंसान की मौत को साइंस में क्लिनिकल डेथ कहते हैं। लेकिन मौत एक झटके में नहीं होती। दिल की धड़कन रुकते ही दिमाग को ऑक्सीजन और ब्लड की सप्लाई रुक जाती है। 4 से 6 मिनट के अंदर न्यूरॉन्स मरने लगते हैं। 10 से 15 मिनट बाद के अंदर यह मर जाते हैं, लेकिन दिमाग का कुछ हिस्सा आखिरी ऊर्जा का इस्तेमाल करके एक्टिव रहता है।

घंटों जिंदा रह सकता दिमाग

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वैज्ञानिक कहते हैं कि दिमाग कुछ विशेष हालातों में घंटों तक एक्टिव रह सकता है। शरीर ठंडा हो या CPR दिया जा रहा हो तो दिमाग की तरंगों में स्पाइक मिलते हैं। कुछ मामलों में दिल रुकने के 30 से 60 मिनट बाद तक न्यूरल एक्टिविटी मिली, जिसे 'वेव ऑफ डेथ' कहते हैं। इसी वजह से अंगदान की प्रक्रिया हमेशा 'ब्रेन डेथ' की पुष्टि होने के बाद ही शुरू की जाती है।

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लाइफ रिव्यू करता दिमाग

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वैज्ञानिक कहते हैं कि दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे मरती हैं। इसलिए ऑक्सीजन के बिना भी दिमाग कई घंटों या कई दिनों तक जिंदा रह सकता है। इसलिए विज्ञान अभी भी उस लाइन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जहां दिमाग की चेतना पूरी तरह खत्म हो जाती है। साल 2022 में 87 साल के मरीज पर रिसर्च किया गया तो पता चला कि दिल रुकने से 30 सेकंड पहले और बाद में 'गामा वेव्स' उछलती हैं। तब इंसान की दिमाग जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं को 'रीप्ले' करता होता है, जिसे वैज्ञानिक 'लाइफ रिव्यू' कहते हैं।

सुनने की शक्ति का अंत

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क्या मरने के बाद दिमाग सुन सकता है? इस सवाल का जवाब 'यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया' के 2020 की एक रिसर्च में मिला। रिसर्चर्स ने कहा कि 'सुनने वाली इंद्री सबसे आखिर में इंसान का साथ छोड़ती है। जब मरीज का शरीर प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है और बेहोश होता है तो दिमाग का 'ऑडिटरी प्रोसेसिंग सिस्टम' साउंड पर रिएक्ट करता है, यानी मर रहा व्यक्ति अपने परिवार की बातें, आवाजें, म्यूजिक सुन सकता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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