10 सेकंड में 64 रॉकेट से हमला, जानें कितना खतरनाक है भारत का नया हथियार 'भार्गवास्त्र' और क्या हैं इसके फीचर्स?

भारतीय सेना ने अपनी ड्रोन सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम अब अपने अंतिम परीक्षण में है. सभी परीक्षण दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग मुनिशन और खासकर स्वार्म अटैक को खत्म करने के लिए बनाई गई है.

bhargavastra anti drone syste
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कैसे करता है भार्गवास्त्र ड्रोन काम?

कैसे करता है भार्गवास्त्र ड्रोन काम?2 / 6

भार्गवास्त्र एक लेयर्ड हार्ड-किल इंटरसेप्शन आर्किटेक्चर पर काम करता है. इसमें एक सिंगल लॉन्चर में 64 माइक्रो-रॉकेट्स या मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. पूरा सैलवो यानी यानी सभी हथियार एक साथ सिर्फ 10 सेकंड में दागे जा सकते हैं. यह क्षमता इसे ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती है. सिस्टम मध्यम और बड़े यूएवी (UAV) को 10 किलोमीटर दूर से और छोटे ड्रोन को 6 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है.

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होगी दोहरी मारक क्षमता

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भार्गवास्त्र में दो प्रकार के हथियार लगे हैं. स्वार्म हमलों को रोकने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो बहुत बड़े क्षेत्र को भी कवर करते हैं. वहीं सटीक हमले के लिए गाइडेड माइक्रो-मिसाइल्स का उपयोग होता है, जो अपने टारगेट पर सीधा और सटीक हमला करता है. यह हिट-टू-किल तकनीक पर काम करता है. सिस्टम को C4I नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है और इसमें EO/IR सेंसर लगे हैं, जो दिन रात किसी भी मौमस में काम कर सकते हैं.

अलग तरह से किया गया है डिजाइन

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भार्गवास्त्र को भारत की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थतियों को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किया गया है. यह रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी ढंग से काम करता है. यह क्षमता इसे सीमा सुरक्षा, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा के लिए बेस्ट बनाती है.

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युद्ध में होगा बेहद अहम

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आज के दौर में चल रहे युद्ध में ड्रोन और स्वार्म अटैक सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं. कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम 100% सुरक्षा नहीं दे सकता है. ऐसे में भार्गवास्त्र जैसे सिस्टम महत्वपूर्ण संपत्तियों के चारों ओर घना ओवरलैपिंग कवच तैयार करते हैं. महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 4-6 भार्गवास्त्र सिस्टम तैनात करने से दुश्मन के सैचुरेशन अटैक को रोकना आसान हो जाएगा. वहीं, दूसरी तरफ अन्य डिफेंस सिस्टम की लागत ज्यादा आती है.

स्वदेशी एंटी-ड्रोन शील्ड विकसित करने में भारत का बड़ा कदम

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यह सिस्टम भारत को स्वदेशी एंटी-ड्रोन शील्ड विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पूरी तरह भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित भार्गवास्त्र न सिर्फ सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएगा बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम करेगा. अंतिम परीक्षण सफल होने के बाद भारतीय सेना में इसका शीघ्र शामिल होना भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगा. ड्रोन युद्ध के इस नए युग में भार्गवास्त्र जैसे स्वदेशी हथियार भारत को मजबूत सुरक्षा कवच देगा.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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