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ChatGPT India Report: भारतीय यूजर्स अब केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कोडिंग, डेटा एनालिसिस और जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए ChatGPT जैसे टूल्स का सहारा ले रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, Codex जैसे AI कोडिंग टूल के यूजर्स में सिर्फ दो हफ्तों में चार गुना तक बढ़ोतरी देखी गई. जहां कोडिंग और डेटा एनालिसिस में भारतीय यूजर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'एलीट' कैटेगरी में हैं.
AI इकोसिस्टम में दिख रही ग्रोथ

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भारत की युवा आबादी और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने की क्षमता उसे इस रेस में आगे रखती है. अगर AI को ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए और इसकी पहुंच छोटे शहरों तक बढ़ाई जाए, तो भारत इस क्षेत्र में और भी बड़ा लीडर बन सकता है. यह रिपोर्ट साफ दिखाती है कि AI सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हर वर्ग तक पहुंचाना ही असली सफलता होगी.
अलग-अलग राज्यों में AI का अलग इस्तेमाल

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दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में AI का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के लिए हो रहा है. असम, ओडिशा, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे पूर्वी राज्यों में छात्र पढ़ाई और सीखने के लिए AI का सबसे ज्यादा उपयोग कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर, पंजाब, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में लोग हेल्थ और वेलनेस से जुड़े सवाल पूछने के लिए AI की मदद ले रहे हैं.
AI के मामले में पीछे हैं छोटे शहर

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इस तरक्की के बीच एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है. भारत के मात्र 10 प्रमुख शहर ही देश के कुल 50% AI यूजर्स को कवर करते हैं. Delhi NCR इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जिसके बाद बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद का नंबर आता है. रिपोर्ट बताती है कि बड़े और छोटे शहरों के बीच एक बड़ी खाई है. उदाहरण के तौर पर, बड़े शहरों में डेटा एनालिसिस का उपयोग छोटे शहरों के मुकाबले 30 गुना ज्यादा है. वहीं कोडिंग में यह अंतर 4 गुना तक है.
क्या है भविष्य की चुनौती?

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जीन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, Oliver Jay के अनुसार, भारत को AI का ग्लोबल लीडर बनाने के लिए इस तकनीक को छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना होगा. इसके लिए स्थानीय भाषाओं में AI की उपलब्धता, सस्ती दरें और बेहतर इंटरनेट बुनियादी ढांचा सबसे जरूरी है. अगर भारत अपनी युवा आबादी को AI से जोड़ देता है, तो यह वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन सकता है.