बैंक में नकदी जमा करने वालों के लिए अहम फैसला, टैक्सपेयर्स के लिए सबक

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ( ITAT) का यह फैसला उन टैक्सपेयर्स को सबक देगा जो समय-समय पर बचत के पैसे खाते से निकलवा तो लेते हैं, लेकिन जब दोबारा खाते में जमा करते हैं और उनपर टैक्स लग जाए तो क्या किया जाए? यह मामला नोटबंदी के दौरान बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपये जमा करने से जुड़ा है. पूर्णिमा दास ने बैंक से 15 लाख रुपए निकाल घर में रखे, फिर जमा किए तो लग गया टैक्स. इस मामले में ITAT ने खाताधारक के हक में फैसला दिया है.

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बैंक में नकद जमा करने वालों के लिए सामने आए ITAT के एक फैसले ने उन लोगों के लिए रास्ता साफ कर दिया है जो अपनी ही बचत को घर में रखने के बाद बैंक में जमा करते हैं. मान लीजिए कि आपने किसी काम के लिए अपने बैंक अकाउंट से बड़ी रकम निकाली. कई दिनों या हफ्तों या महीनों बाद भी वह काम नहीं हुआ. बैंक से निकाला वह कैश अभी भी आपके घर में ही रखा था. बाद में आप उस कैश को वापस अपने बैंक अकाउंट में जमा करा आते हैं. सोचिए, कुछ समय बाद उस रकम को लेकर इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपको नोटिस आए तो आप पर क्या गुजरेगी.

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क्या है पूर्णिमा दास का पूरा मामला?

क्या है पूर्णिमा दास का पूरा मामला?2 / 5

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक करदाता महिला पूर्णिमा दास ने साल 2016 से काफी पहले अपने बैंक खाते से समय-समय पर कुल 15 लाख रुपये नकद निकाले थे. जब साल 2016 में नोटबंदी हुई तो महिला ने वही पुराना कैश वापस बैंक खाते में जमा कर दिया. टैक्स विभाग ने इस कैश पर आपत्ति जताई और असेसिंग ऑफिसर (AO) ने इस जमा राशि को अघोषित आय करार दे दिया. न्याय का सिद्धांत कहता है कि संदेह, चाहे कितना भी गहरा हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता.

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तर्क बनाम सबूत

तर्क बनाम सबूत3 / 5

करदाता यानी पूर्णिमा दास ने कहा कि यह कोई नई कमाई नहीं थी, बल्कि पहले बैंक से निकाली गई उनकी अपनी रकम थी, जिसे घर में रखा गया था. बैंक रिकॉर्ड में नकद निकासी का पूरा विवरण मौजूद था. टैक्स अधिकारी (AO) ने कहा कि कोई समझदार व्यक्ति इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक घर में बेकार नहीं रखेगा. वह या तो उसे निवेश करेगा, खर्च करेगा या ब्याज कमाएगा, इसलिए यह कहानी विश्वसनीय नहीं लगती. इसी तर्क पर अधिकारी ने जमा रकम को अघोषित आय मान लिया.

ITAT का फैसला करदाता के हक में

ITAT का फैसला करदाता के हक में4 / 5

ट्रिब्यूनल ने टैक्स अधिकारी के इस तर्क को पूरी तरह गलत माना और करदाता के हक में फैसला दिया. बैंक स्टेटमेंट से साफ था कि पैसा पहले निकाला गया था. विभाग के पास यह साबित करने का कोई सबूत नहीं था कि वह पैसा कहीं और खर्च हो गया है. कोर्ट ने कहा कि कोई बात असंभव या अजीब लग सकती है, लेकिन जब तक उसे गलत साबित करने के लिए ठोस सबूत न हों, तब तक उसे टैक्स के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता.

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टैक्सपेयर्स के लिए तीन बड़े सबक

टैक्सपेयर्स के लिए तीन बड़े सबक5 / 5

1. बैंक से पैसे निकालने की रसीदें और स्टेटमेंट हमेशा संभाल कर रखें. 2. अपनी आय और खर्च का एक बुनियादी हिसाब रखें ताकि पैसों का सोर्स बताया जा सके. 3. अगर आपके पास इनकम का वैध सोर्स है, तो केवल विभाग की धारणा के आधार पर आप पर जुर्माना नहीं लग सकता.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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