एक ऑटो में 1,2,3,4,5,6 नहीं बल्कि पूरे 19 लोग, देश में ऑटो को लेकर क्या हैं नियम? सरकारी आदेश ताक पर रख दौड़ाए जा रहे वाहन

आपने अक्सर देखा होगा कि एक ऑटो में हमेशा नियम से ज्यादा लोग बैठे रहते हैं. चाहे वो दिल्ली-एनसीआर के ऑटो हो या फिर किसी भी छोटे शहर के एक ऑटो में हमेशा नियम से ज्यादा लोग बैठे हुए दिखते हैं. इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि ऑटो के लिए ये नियम भी ऑटोमेटिक चल रहे हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये चर्चा अभी क्यों हो रही है तो आपको बता दें कि इसकी चर्चा ने हाल में जोर पकड़ा है जब एक ऑटो से 1,2, 3,4 या फिर 5 नहीं पूरे 19 लोगों को बाहर निकाला गया. जी हां सही पढ़ा आपने पूरे के पूरे 19 लोग एक ऑटो से बाहर निकले.

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कहां का है मामला?

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बता दें कि ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज का है. जहां ट्रैफिक पुलिस ने जब एक ऑटो वाले को रोका तो उसमें में सवारियों के उतरने का सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा था. ऑटो में से एक एक कर पूरे 19 लोग बाहर निकाले गए.

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एक ऑटो से निकले पूरे 19 लोग

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जब ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को ऑटो से उतरने को कहा, तो सवारियों की संख्या 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 नहीं बल्कि पूरी 19 थी. इन 19 लोगों में बच्चे और बड़े सभी शामिल थे.

ऑटो चालक ने क्या कहा?

ऑटो चालक ने क्या कहा?4 / 7

वहीं, पुलिस ने जब ऑटो चालक से इतनी सवारियों को बैठाने की वजह पूछी तो, उसने बताया कि सवारी तो 15 ही हैं, बाकि 4 तो बच्चे हैं. इस घटना के बाद पुलिस ने ऑटो को सीज कर दिया और सभी यात्रियों को दूसरे वाहन से सुरक्षित आगे भेज दिया. https://x.com/Vershasingh26/status/2067843787049902115?s=20

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कितनी सवारी बैठा सकते हैं?

कितनी सवारी बैठा सकते हैं?5 / 7

ये तो सिर्फ एक मामला है, लेकिन अगर आप भी अपने शहर की सड़कों पर नजर दौड़ाएंगे, तो पाएंगे कि हर तरफ ऑटो में ज्यादा सवारियां भरी हैं. कई बार तो ऑटो चालक तब तक सवारी भरता है, जबकि उसे लगता है कि ऑटो चल सकता है. ऐसे में एक सवाल ये भी है कि भारत में किसी ऑटो में कितने लोगों को बैठाया जा सकता है. आधिकारिक रूप से छोटे ऑटो में 3 लोगों को बैठाया जा सकता है. ड्राइवर सहित इसमें 4 लोगों के बैठने की जगह होती है, लेकिन ऑटो भी कई प्रकार के होते हैं. Piaggio Ape Auto+ जैसे ऑटोरिक्शा में 6 लोगों के बैठने की जगह होती है, जिसमें 5 पैसेंजर और 1 ड्राइवर की जगह होती है.

अलग-अलग ऑटो के नियम अलग

अलग-अलग ऑटो के नियम अलग6 / 7

वहीं पुराने शहरों में एक पॉपुलर ऑटो विक्रम ब्रांड नेम के तहत आता है. इस ऑटो को स्कूटर इंडिया लिमिटेड बनाती थी, जो अब ऑपरेट नहीं कर रही है. इस ऑटो में भी आधिकारिक रूप से 6 लोगों के बैठने की जगह होती थी, लेकिन इन ऑटो को आफ्टर मार्केट में काफी हैवी कस्टमाइज किया जाता था.

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क्या कहता है नियम?

क्या कहता है नियम?7 / 7

खबरों के अनुसार, ऑटोरिक्शा 3 सीटर या 5 सीटर (पैसेंजर) सेटअप में आते हैं. इसके बाद बैठने के लिए जो जगह बनाई जाती है, वो गैरकानूनी मॉडिफिकेशन होता है. इस मॉडिफिकेशन को ऑटो खरीदने के बाद कराया जाता है. इसके रोकने के कई तरीके हैं. ऑटोरिक्शा को हर दो साल पर फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है. अगर वहां पर अथॉरिटी इन मॉडिफिकेशन्स को चेक करें, तो इसे रोकने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा ये भी हो सकता है कि फिटनेस के लिए जाते हुए ड्राइवर मॉडिफिकेशन को हटा देते हों.'

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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