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प्राचीन मेसोपोटामिया की सभ्यता में सुमेर से लेकर बेबीलोन तक महिलाओं ने समाज को गढ़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई. भले ही राजनीति में पुरुषों का नाम ज्यादा रहा लेकिन महिलाओं के बिना वहां के समाज की बुनियाद अधूरी थी.
क्या काम करती थीं महिलाएं?

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मेसोपोटामिया की महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं थीं बल्कि वे व्यापार और उत्पादन के कामों में भी हाथ बंटाती थीं. वे कपड़ा बुनने, बीयर बनाने और बाजारों में सामान बेचने जैसे जरूरी आर्थिक कामों में सक्रिय रूप से जुडी हुई थीं.
कैसी थी उनकी कानूनी स्थिति?

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उस दौर के कानूनों ने महिलाओं पर कई पाबंदियां लगाई थीं लेकिन उन्हें संपत्ति रखने और अपना खुद का बिजनेस करने का हक भी था. वे कानूनी दस्तावेजों पर गवाह बन सकती थीं और अदालतों में अपने अधिकारों के लिए लड़ भी सकती थीं.
क्या था शिक्षा का स्तर?

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उच्च वर्ग की महिलाएं और राजघराने की औरतें पढ़ना-लिखना जानती थीं और वे मंदिर के प्रशासन में बड़े पदों पर आसीन थीं. कुछ महिलाएं तो पुजारिन के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों का नेतृत्व भी करती थीं जिन्हें समाज में बहुत सम्मान मिलता था.
कैसा था पारिवारिक जीवन?

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परिवार में महिलाओं की सबसे मुख्य जिम्मेदारी बच्चों का पालन-पोषण करना और घरेलू व्यवस्था को सही तरीके से चलाना होता था. विवाह के बाद वे अपने पति के घर की देखरेख करती थीं और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद करती थीं.
क्या है उनका असली प्रभाव?

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मेसोपोटामिया की इन महिलाओं के योगदान के बिना वहां के बड़े साम्राज्यों की तरक्की और संस्कृति का टिक पाना नामुमकिन था. उनकी मेहनत और सूझबूझ ने ही दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक को फलने-फूलने का मौका दिया.
क्या थी समाज में उनकी जगह?

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करीब 3500 ईसा पूर्व से लेकर 539 ईसा पूर्व तक महिलाओं का जीवन कड़े कानूनों और सामाजिक नियमों के बीच बंधा हुआ था. इन पाबंदियों के बावजूद वे अपने परिवार और समाज को चलाने के लिए मुख्य आधार स्तंभ मानी जाती थीं.