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साधु संतों को भीषण गर्मी में अग्नि तप करते हुए तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन 43 डिग्री तापमान में किसी रशियन महिला को 9 धूनी अग्नि तप करते हुए शायद ही कभी किसी ने देखा हो. बता दें कि एक रशियन महिला इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. राजस्थान के पुष्कर में ये रशियन महिला अपनी इस अनोखी तपस्या को लेकर चर्चा में है.
सोशल मीडिया पर वायरल रशियन साधु महिला

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3 मई से शुरू हुई महिला की यह अग्नि तपस्या 25 मई तक चलेगी. महिला की यह तपस्या देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा में है. दूर-दूर से लोग इस रशियन महिला की तपस्या देखने के लिए पुष्कर पहुंच रहे हैं. इस महिला की तपस्या के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं.
कौन है ये रशियन महिला?

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मिली जानकारी के अनुसार, रूस की रहने वाली राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ सिर्फ एक देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इस समय चर्चा में हैं. बताया जा रहा है कि इन्होंने 10 साल पहले नाथ संप्रदाय अपनाया था. उसके बाद से वो लगातार नाथ संप्रदाय के रीति रिवाज के साथ ही अपना जीवन यापन कर रही हैं. 17 साल पहले भारत आई थी और अब उनका जीवन पूरी तरह से शिव भक्ति योग और सेवा में ही समर्पित है. फिलहाल उनके पास रूसी नागरिकता भी है और वो टूरिस्ट वीजा पर भारत में रहती हैं.
21 दिन तक चलेगी अग्नि तपस्या

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वहीं, पुष्कर में छोटी बस्ती स्थित श्मशान भूमि में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर राधिका योगिनी ने नौ धूनियों के बीच बैठकर 21 दिन अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है. उनकी यह तपस्या 25 मई तक चलेगी. इस साधना के दौरान योगिनी रोजाना लगभग सवा तीन घंटे तक दहकती अग्नि के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप कर रही हैं. तपस्या के साथ हर दिन वह हवन पूजन और आरती का भी आयोजन करती हैं.
गुरु और शिष्य कर रहे अग्नि तपस्या

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25 मई को साधना की पूर्ण आहुति देने के साथ ही वह संत भंडारे का भी आयोजन करेंगी. यह तपस्या वह अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सानिध्य में कर रही हैं. अन्नपूर्णा नाथ की यह पहली अग्नि तपस्या है, जबकि उनके गुरु पहले भी चार बार ऐसी अग्नि तपस्या कर चुके हैं.
बेहद कठिन है यह तपस्या

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यह तपस्या हर दिन पूरे विधि विधान के साथ शुरू होती है. यह साधना अन्य साधनाओं की तुलना में काफी कठिन मानी जाती है. दोनों गुरु और शिष्य साधना शुरू करने से पहले भस्म लेप करते हैं और उसके बाद सुबह 11 बजे से दोपहर करीब सवा 2 बजे तक अग्नि की धूनियों के बीच योग मुद्रा में बैठते हैं. धूनियों को गोबर के कंडों से प्रज्वलित किया जाता है. इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है. अंतिम दिन 108 कंडों का प्रयोग किया जाएगा.