
1 / 5
सम्राट चौधरी के सामने सबसे पहली चुनौती अपने खिलाफ उठे सवाल और विवादित मामले होंगे। लालू-राबड़ी सरकार में कम उम्र का मंत्री बनने पर सवाल उठे थे। उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हुआ। बालिग और नाबालिग वाले मामले में वे आज भी RJD के टारगेट पर हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई और एजुकेशनल डिग्री भी सवालों में रहती है। ऐसे में उन्हें अब विपक्ष के वार से बचना होगा।
नीतीश कुमार की भ्रष्टाचार रहित छवि

2 / 5
सम्राट चौधरी के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार की भ्रष्टाचार का दाग न लगने देने की लकीर है, जो उन्होंने साल 2005 से अब तक खींच के रखी थी। जी हां, नीतीश कुमार ने खुद पर भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगने दिया। इस लकीर को कायम रखना बड़ी चुनौती होगी। क्राइम कंट्रोल से लेकर पुलिस की छवि साफ रखेंगे और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करांएगे तो जनता का विश्वास जीत पाएंगे।
जात-पात से ऊपर उठकर काम करना

3 / 5
सम्राट चौधरी के सामने तीसरी चुनौती जाति नहीं, जनता के लिए काम करने की होगी। कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश कुमार पर 20 साल के कार्यकाल में जातिवाद के आरोप नहीं लगे। जाति के आधार पर किसी से अत्याचार नहीं किया और न ही होने दिया। नीतीश कुमार के विरोधी भी कहते हैं कि वे जात-पात से ऊपर उठकर काम करते हैं, इसलिए सम्राट चौधरी को भी ऐसी छवि बनानी होगी।
बिहार का क्राइम कंट्रोल करना चैलेंज

4 / 5
सम्राट चौधरी के सामने चौथी चुनौती बिहार में क्राइम को कंट्रोल करना रहेगा। लालू-राबड़ी के शासनकाल में कई क्रिमिनल केस दर्ज हुए थे, जो आज भी अपने गिरोह चला रहे हैं। इनको बिहार से बाहर रखना ही फायदेमंद रहेगा। नही तो सम्राट चौधरी के लिए मुसीबत बन सकते हैं। बिहार में भूमि विवाद आम बात है। जमीन को लेकर अल्पसंख्यक जातियां अपने ही इलाके के बहुसंख्यकों के निशाने पर रहती हैं। इन इलाकों में पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार करना और थानेदारों की पोस्टिंग करते समय सावधानी बरतना बड़ा चैलेंज रहेगा।
भ्रष्टाचार पर नीतीश भी नहीं लगाए पाए रोक

5 / 5
सम्राट चौधरी के सामने 5वीं चुनौती भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की रहेगी। क्योंकि नीतीश कुमार के राज में भी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग सकी। विजिलेंस और आर्थिक अपराध इकाई की रेड पड़ती रही हैं। किशनगंज के SDPO गौतम कुमार और टाउन थानेदार अभिषेक रंजन का मामला ताजा उदाहरण हैं। बिहार के कई अफसर आय से ज्यादा कमाई के मामले में फंसे हैं। इसलिए भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसना सबसे बड़ी चुनौती होगा, जिसके लिए उन्हें एक मैकेनिज्म बनाना होगा। अगर इस चुनौती का पार किया तो नीतीश कुमार से आगे निकलेंगे।