बिहार के नए CM सम्राट चौधरी के लिए 5 चुनौतियां; मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली, कांटों का ताज भी पड़ेगा पहनना
सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं, लेकिन बतौर CM उनका नया राजनीतिक सफर आसान नहीं होगा। क्योंकि नीतीश कुमार के 20 साल के राज के बाद उनकी बारी आई है और उनके सामने 20 साल में सरकार के सामने आई चुनौतियां होंगी, जिनसे उन्हें पार पाना है। आइए सम्राट चौधरी के रास्ते में आने वाले कांटों की बात करते हैं...

नीतीश कुमार की भ्रष्टाचार रहित छवि
2 / 5सम्राट चौधरी के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार की भ्रष्टाचार का दाग न लगने देने की लकीर है, जो उन्होंने साल 2005 से अब तक खींच के रखी थी। जी हां, नीतीश कुमार ने खुद पर भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगने दिया। इस लकीर को कायम रखना बड़ी चुनौती होगी। क्राइम कंट्रोल से लेकर पुलिस की छवि साफ रखेंगे और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करांएगे तो जनता का विश्वास जीत पाएंगे।
जात-पात से ऊपर उठकर काम करना
3 / 5सम्राट चौधरी के सामने तीसरी चुनौती जाति नहीं, जनता के लिए काम करने की होगी। कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश कुमार पर 20 साल के कार्यकाल में जातिवाद के आरोप नहीं लगे। जाति के आधार पर किसी से अत्याचार नहीं किया और न ही होने दिया। नीतीश कुमार के विरोधी भी कहते हैं कि वे जात-पात से ऊपर उठकर काम करते हैं, इसलिए सम्राट चौधरी को भी ऐसी छवि बनानी होगी।
बिहार का क्राइम कंट्रोल करना चैलेंज
4 / 5सम्राट चौधरी के सामने चौथी चुनौती बिहार में क्राइम को कंट्रोल करना रहेगा। लालू-राबड़ी के शासनकाल में कई क्रिमिनल केस दर्ज हुए थे, जो आज भी अपने गिरोह चला रहे हैं। इनको बिहार से बाहर रखना ही फायदेमंद रहेगा। नही तो सम्राट चौधरी के लिए मुसीबत बन सकते हैं। बिहार में भूमि विवाद आम बात है। जमीन को लेकर अल्पसंख्यक जातियां अपने ही इलाके के बहुसंख्यकों के निशाने पर रहती हैं। इन इलाकों में पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार करना और थानेदारों की पोस्टिंग करते समय सावधानी बरतना बड़ा चैलेंज रहेगा।
भ्रष्टाचार पर नीतीश भी नहीं लगाए पाए रोक
5 / 5सम्राट चौधरी के सामने 5वीं चुनौती भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की रहेगी। क्योंकि नीतीश कुमार के राज में भी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग सकी। विजिलेंस और आर्थिक अपराध इकाई की रेड पड़ती रही हैं। किशनगंज के SDPO गौतम कुमार और टाउन थानेदार अभिषेक रंजन का मामला ताजा उदाहरण हैं। बिहार के कई अफसर आय से ज्यादा कमाई के मामले में फंसे हैं। इसलिए भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसना सबसे बड़ी चुनौती होगा, जिसके लिए उन्हें एक मैकेनिज्म बनाना होगा। अगर इस चुनौती का पार किया तो नीतीश कुमार से आगे निकलेंगे।
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