भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस साल मानसून पर एल नीनो का असर पड़ सकता है. IMD प्रमुख के मुताबिक, ये हालात सितंबर तक बने रह सकते हैं, जिससे कई राज्यों में कम बारिश, गर्मी और खेती पर असर देखने को मिल सकता है.
क्या होता है एल नीनो?

2 / 7
एल नीनो एक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है. इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है. भारत में ये अक्सर कमजोर मानसून, सूखे और ज्यादा गर्मी की वजह बनता है.
सितंबर तक बना रह सकता है असर

3 / 7
IMD के मुताबिक, जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो एक्टिव रह सकता है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे सकता है. IMD ने पहले ही 2026 के मानसून को सामान्य से कमजोर बताया है. विभाग के मुताबिक, इस बार देशभर में बारिश औसत का लगभग 90 से 92 प्रतिशत रह सकती है.
किसानों की बढ़ सकती है चिंता

4 / 7
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ सकता है. धान, दालें, कपास और मक्का जैसी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. देश के कई हिस्सों में सिंचाई की सुविधा सीमित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
हीटवेव और जल संकट का खतरा

5 / 7
विशेषज्ञों के मुताबिक, एल नीनो की वजह से इस साल ज्यादा गर्मी पड़ सकती है. कई राज्यों में हीटवेव की स्थिति और जल संकट गहरा सकता है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों पर खास असर पड़ने की आशंका जताई गई है.
खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी

6 / 7
कम बारिश और खेती पर पड़ी मार का असर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है. फूड आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
सरकार और एजेंसियां अलर्ट मोड पर

7 / 7
IMD लगातार समुद्री तापमान और मानसून की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है. सरकार और मौसम एजेंसियां राज्यों को समय-समय पर चेतावनी और सलाह जारी कर रही हैं ताकि नुकसान को कम किया जा सके.