तेलंगाना में आज यानी 10 जुलाई को स्कूल बंद का ऐलान है. जिसका ऐलान छात्र संगठनों के एक संयुक्त मंच ने किया है. इस बड़े कदम के कारण राज्य में कई जरूरी सेवा प्रभावित होने की खबर भी सामने आ रही है, जिसका सीधा असर आम जनता पर बढ़ रहा है. आइए हम आपको बताते हैं आखिर किस कारण बंद का फैसला लिया गया और छात्र संगठनों की क्या मांगे हैं?
तेलंगाना में कैसा दिख रहा बंद का असर?

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छात्र संगठनों के बंदी के ऐलान के बाद राज्य के कई प्राइवेट स्कूलों ने आज 10 जुलाई को छुट्टी का नोटिस अभिभावकों को भेजा है. हालांकि, सरकारी स्कूल और राज्य द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान ने इस बंदी के कारण किसी तरह की नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है.
प्राइवेट स्कूलों ने आज क्यों घोषित की छुट्टी?

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में राज्य में मौजूद प्राइवेट स्कूलों ने अभिभावकों को टेक्स्ट मैसेज के जरिए 10 जुलाई को छुट्टी का नोटिस भेजा था. बताया जा रहा है कि यह फैसला अलग-अलग स्कूलों मैनेजमेंट ने 'बंद' के दौरान छात्रों के ट्रांसपोर्ट और कैंपस के कामकाज में किसी तरह की रुकावट पैदा न हो, इसके लिए लिया है.
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जारी

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एक तरफ जहां प्राइवेट स्कूलों ने छुट्टी का घोषित किया है, वहीं, सरकारी स्कूलों और राज्य द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान बिना किसी आधिकारिक छुट्टी की सूचना के खुले रहेंगे. हालांकि, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जारी विरोध के कारण कुछ जगहों पर सामान्य कामकाज प्रभावित हैं ऐसी खबर सामने आ रही है.
किन लोगों ने किया तेलंगाना बंद का ऐलान?

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शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आह्वान छात्र संगठनों के एक संयुक्त मंच ने किया है, जिसमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (PDSU), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) शामिल हैं.
क्यों तेलंगाना में स्कूलों को बंद करने का हुआ ऐलान?

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रिपोर्ट के अनुसार, छात्र संगठन शिक्षा क्षेत्र के कई हिस्सों में बदलाव की मांग कर रहे हैं. उनकी मांगों में एक ऐसे प्रस्ताव को वापस लेना शामिल है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि इससे लगभग राज्य के 27,000 सरकारी स्कूलों को करीब 4000 क्लस्टर कैंपस में मिला दिया जाएगा. यानी उनका दावा है कि जहां अभी राज्यों में 27000 सरकारी स्कूल मौजूद हैं, उनकी संख्या घटकर 4000 हो जाएगी, जिसका असर गरीब बच्चों पर पड़ेगा.
प्राइवेट स्कूलों में फीस मॉडल को लेकर भी मांग

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छात्र संगठन का की मांग है कि प्राइवेट और कॉर्पोरेट शिक्षण संस्थानों द्वारा ली जाने वाली भारी-भरकम फीस को कंट्रोल करने के लिए कानून बनाया जाए, ताकि हर कोई शिक्षा हासिल कर सके.
खली पदों पर आवेदन के लिए भी रखी अपनी मांगे

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संगठनों ने शिक्षकों, मंडल शिक्षा अधिकारियों (MEOs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और लेक्चररों के खाली पदों को तुरंत भरने की भी मांग भी सरकार के सामने रखी हैं. साथ ही, वर्तमान में जहां भी किराए की जगहों पर चल रहे सरकारी स्कूलों, हॉस्टलों और गुरुकुल संस्थानों के लिए पक्की इमारतों की मांग की. (Image: AI/Pexels)
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