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सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडे के अनुसार, प्रतीक यादव को सुबह करीब 6 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे। उनकी पल्स पूरी तरह डाउन हो चुकी थी। उनकी आंखें स्थिर थीं। दिल ने काम करना बंद कर दिया था। शरीर में कोई हलचल भी नहीं थी। प्रतीक को ब्रॉटडेट घोषित किया गया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में 4 डॉक्टरों की टीम ने उनका पोस्टमार्टम किया।
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शरीर पर 6 चोटों के निशान मिले

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान प्रतीक के शरीर पर 6 चोटों के निशान मिले हैं। छाती पर, दाईं बाजू, दाईं कलाई, कोहनी और बाईं कलाई पर चोटें लगी हैं। स्टेरॉयड्स की मौजूदगी नहीं मिली ओर न ही किसी प्रकार के नशीले पदार्थ या ड्रग्स का सेवन किया गया था। प्रतीक की मौत फेफड़ों में खून के थक्के जमने से हुई, जिसे मस्कुलर थ्रोम्बोम्बोलिज्म कहते हैं। ब्लड नहीं मिलने से दिल ने काम करना बंद किया।
प्रतीक को कब-कैसे लगी चोटें?

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, चोटें कई दिन पुरानी हैं। वहीं जब चोटों के बारे में परिवार से बात की गई तो पता चला कि 2 अलग-अलग घटनाओं में प्रतीक को चोटें लगी थीं। 29 अप्रैल को प्रतीक घर में ही गिर गए थे। उन्हें 29 अप्रैल को मेदांता अस्पताल में लाया गया था, जहां CT स्कैन भी हुआ था। अगले दिन भर्ती कराए गए और 3 दिन इलाज चला। ठीक होने पर डॉक्टर रचित शर्मा ने उन्हें डिस्चार्ज करके घर भेज दिया था।
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एक दिन पहले भी गिरे थे प्रतीक

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परिवार के अनुसार, प्रतीक एक दिन पहले भी घर में गिर गए थे। क्योंकि मई के पहले हफ्ते में उनके बाएं पैर की सर्जरी हुई थी, जिस वजह से पैर में सूजन थी और चलने-फिरने में दिक्कत थी। इसी वजह से वह स्लिप होकर गिर गए थे। लेकिन सर्जरी के बाद वे ज्यादातर कमरे में ही रहते थे। 3-4 दिन से तो वह काम के लिए भी बाहर नहीं गए थे। आखिरी समय में भी वे किचन में बेहोशी की हालत में पड़े मिले थे।
खून पतला करने की दवाओं का सेवन

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परिवार के अनुसार, प्रतीक काफी समय से एंटीकोएगुलेंट यानी ब्लड थिनर की दवाई ले रहे थे। जो लोग ऐसी दवाई लेते हैं, उनकी मामूली चोट भी गंभीर और गहरी नजर आती है। प्रतीक यादव लंबे समय से पल्मोनरी एंबॉलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी में फेफड़ों की नसों में खून के थक्के जम जाते हैं। यह बीमारी पैरों की नसों में क्लॉट बनने से जुड़ी है, जो फेफड़ों तक पहुंच जाती है। इसी वजह से वह ब्लड थिनर ले रहे थे।
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दिल ने काम करना बंद किया

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, खून के थक्के जमने की वजह से उनके दिल तक ब्लड सर्कुलेशन नहीं पहुंचा और दिल ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उनकी सांसें रुक गईं। खून के थक्के जमने से अचानक सांस फूल जाती है, सीने में तेज दर्द उठता है, बेचैनी होती है और हार्ट अटैक जैसी स्थिति बन जाती है। इसलिए उनके दिल और फेफड़ों से मिले थ्रोम्बोम्बोलिक सामग्री को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।