प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के 5 नए खुलासे; जानें कितनी थीं चोटें, कैसे हुई मौत और क्या कहता है परिवार?

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और BJP नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की अचानक मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया है। 38 साल की उम्र में प्रतीक की मौत हो गई और उनकी मौत की वजह भी एक नहीं है, बल्कि कई ऐसे कारण हैं, जिन्होंने मिलकर प्रतीक को एक झटके में मौत की नींद सुला दिया। आइए जानते हैं कि प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर क्या कहते हैं?

Prateek Yadav
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सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडे के अनुसार, प्रतीक यादव को सुबह करीब 6 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे। उनकी पल्स पूरी तरह डाउन हो चुकी थी। उनकी आंखें स्थिर थीं। दिल ने काम करना बंद कर दिया था। शरीर में कोई हलचल भी नहीं थी। प्रतीक को ब्रॉटडेट घोषित किया गया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में 4 डॉक्टरों की टीम ने उनका पोस्टमार्टम किया।   यह भी पढ़ें: कौन थे अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव? मुलायम सिंह की पहली या दूसरी किस पत्नी से था कनेक्शन

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शरीर पर 6 चोटों के निशान मिले

शरीर पर 6 चोटों के निशान मिले2 / 6

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान प्रतीक के शरीर पर 6 चोटों के निशान मिले हैं। छाती पर, दाईं बाजू, दाईं कलाई, कोहनी और बाईं कलाई पर चोटें लगी हैं। स्टेरॉयड्स की मौजूदगी नहीं मिली ओर न ही किसी प्रकार के नशीले पदार्थ या ड्रग्स का सेवन किया गया था। प्रतीक की मौत फेफड़ों में खून के थक्के जमने से हुई, जिसे मस्कुलर थ्रोम्बोम्बोलिज्म कहते हैं। ब्लड नहीं मिलने से दिल ने काम करना बंद किया।

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प्रतीक को कब-कैसे लगी चोटें?

प्रतीक को कब-कैसे लगी चोटें?3 / 6

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, चोटें कई दिन पुरानी हैं। वहीं जब चोटों के बारे में परिवार से बात की गई तो पता चला कि 2 अलग-अलग घटनाओं में प्रतीक को चोटें लगी थीं। 29 अप्रैल को प्रतीक घर में ही गिर गए थे। उन्हें 29 अप्रैल को मेदांता अस्पताल में लाया गया था, जहां CT स्कैन भी हुआ था। अगले दिन भर्ती कराए गए और 3 दिन इलाज चला। ठीक होने पर डॉक्टर रचित शर्मा ने उन्हें डिस्चार्ज करके घर भेज दिया था।   यह भी पढ़ें: कौन हैं BJP नेता अपर्णा यादव? कितनी पढ़ी-लिखीं और कब जॉइन की राजनीति, 5 पॉइंट में जानें सबकुछ

एक दिन पहले भी गिरे थे प्रतीक

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परिवार के अनुसार, प्रतीक एक दिन पहले भी घर में गिर गए थे। क्योंकि मई के पहले हफ्ते में उनके बाएं पैर की सर्जरी हुई थी, जिस वजह से पैर में सूजन थी और चलने-फिरने में दिक्कत थी। इसी वजह से वह स्लिप होकर गिर गए थे। लेकिन सर्जरी के बाद वे ज्यादातर कमरे में ही रहते थे। 3-4 दिन से तो वह काम के लिए भी बाहर नहीं गए थे। आखिरी समय में भी वे किचन में बेहोशी की हालत में पड़े मिले थे।

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खून पतला करने की दवाओं का सेवन

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परिवार के अनुसार, प्रतीक काफी समय से एंटीकोएगुलेंट यानी ब्लड थिनर की दवाई ले रहे थे। जो लोग ऐसी दवाई लेते हैं, उनकी मामूली चोट भी गंभीर और गहरी नजर आती है। प्रतीक यादव लंबे समय से पल्मोनरी एंबॉलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी में फेफड़ों की नसों में खून के थक्के जम जाते हैं। यह बीमारी पैरों की नसों में क्लॉट बनने से जुड़ी है, जो फेफड़ों तक पहुंच जाती है। इसी वजह से वह ब्लड थिनर ले रहे थे।   यह भी पढ़ें: प्रतीक यादव की उंगलियों के नाखून पड़ गए थे नीले? जानिए ऐसा होना किन बीमारियों का हो सकता है संकेत

दिल ने काम करना बंद किया

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, खून के थक्के जमने की वजह से उनके दिल तक ब्लड सर्कुलेशन नहीं पहुंचा और दिल ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उनकी सांसें रुक गईं। खून के थक्के जमने से अचानक सांस फूल जाती है, सीने में तेज दर्द उठता है, बेचैनी होती है और हार्ट अटैक जैसी स्थिति बन जाती है। इसलिए उनके दिल और फेफड़ों से मिले थ्रोम्बोम्बोलिक सामग्री को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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