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मिडिल ईस्ट मे ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर टेंशन बढ़ गई है। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी की हुई है। इस वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, लेकिन भारत में अप्रैल 2022 से ही पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़े हैं। ऐसे में तेल कंपनियों के लिए कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद 4 साल पुराने रेट पर ही पेट्रोल-डीजल बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल महंगा

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बता दें कि रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू होने के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था, जो इस साल की शुरुआत में घटकर 70 बैरल प्रति बैरल पहुंच गया, लेकिन ईरान-अमेरिका की जंग के कारण रेट फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गया, जिस वजह से भारत की उत्पादन लागत भी बढ़ी।
तेल कंपनियों को 1600 करोड़ प्रतिदिन का घाटा

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तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनियां प्रतिदिन 2400 करोड़ का घाटा उठा रही थीं, जो पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटने के बाद 1600 करोड़ प्रतिदिन हो गया है, जो बहुत भारी नुकसान है।
कंपनियों की पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ाने की तैयारी

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इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का कहना है कि अप्रैल 2022 के बाद से दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लागत बढ़ने के बावजूद भी रिटेल कीमतें नहीं बदली गईं। इसलिए कच्चे तेल के बढ़ते दामों के अनुसार वे पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ाने के लिए मजबूर हैं, जिसे लेकर सरकार से बातचीत जारी है।
चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

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सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव मतदान के बाद एक मई से तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ा सकती हैं, यानी सरकार ने अब तक कीमतों को स्थिर रखा हुआ था, लेकिन तेल कंपनियों के घाटे के कारण उन्हें कंपनियों को रेट बढ़ाने की मंजूरी देनी पड़ सकती है, जो देशवासियों के लिए तगड़ा झटका होगा।