Petrol and diesel prices: कुछ भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल और डीजल देश में सबसे सस्ते हैं, जबकि अन्य राज्यों में सबसे महंगे हैं. विपक्षी शासित राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दामों का यही हाल है. अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के अलग-अलग दामों के पीछे भी काफी खास वजह है.
वैट और लोकल टैक्स से तय होते हैं रेट

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शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम एक जैसे नहीं होते और न राज्यों में एक जैसे होते हैं. हर राज्य तैयार पेट्रोल डीजल पर राज्य स्तरीय वैट और केंद्र द्वारा निर्धारित उत्पाद शुल्क के अतिरिक्त स्थानीय कर लगाता है, जिसकी वजह से भाजपा शासित राज्यों में भी तेल की कीमतों में काफी अंतर दिखाई देता है.
कहां-कहां सस्ता है पेट्रोल-डीजल?

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पेट्रोल-डीजल के दामों में दिल्ली , गोवा और उत्तराखंड देश के सबसे सस्ते बाजारों में शामिल हैं. दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे बनी हुई हैं, जबकि गोवा और उत्तराखंड में भी अन्य कई राज्यों की तुलना में कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं. मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें 107-110 रुपये प्रति लीटर से ऊपर हैं. महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी कीमतें अधिक हैं.
भाजपा शासित राज्यों में महंगा है पेट्रोल-डीजल

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भाजपा शासित उत्तरी राज्यों की तुलना में ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कीमतें और भी अधिक हैं. बिहार में भी भाजपा शासित कई राज्यों की तुलना में पेट्रोल की कीमतें अधिक बनी हुई हैं. भाजपा गठबंधन शासित राज्य सबसे महंगे राज्यों में शामिल हैं. टीडीपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन द्वारा शासित आंध्र प्रदेश, पेट्रोल और डीजल दोनों के लिए सबसे महंगे राज्यों में से एक बना हुआ है, जहां राज्य के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की कीमतें 111 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गई हैं.
विपक्षी दलों के राज्यों में भी महंगा है तेल

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विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में ईंधन की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. कांग्रेस शासित तेलंगाना और केरल, जहां 2026 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ सत्ता में आए थे, वर्तमान में देश में सबसे अधिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों वाले राज्यों में शामिल हैं. कांग्रेस शासित कर्नाटक और तमिलनाडु में भी ईंधन की कीमतें महंगी बनी हुई हैं, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक हैं. पंजाब-हिमाचल में दक्षिण की तुलना में पेट्रोल-डीजल सस्ता है.
राज्यों में ईंधन की कीमतों में अंतर क्यों?

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केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क में एकसमान संशोधन करती है, फिर भी राज्य पेट्रोल और डीजल पर अपना-अपना वैट लगाते हैं. भारत भर में इन करों में व्यापक भिन्नता पाई जाती है. कुछ राज्य राजस्व बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपकर और अधिभार लगाते हैं. परिवहन लागत, डीलर कमीशन और स्थानीय कर राज्यों के बीच अंतर को और भी बढ़ा देते हैं. यही कारण है कि एक राज्य के वाहन चालकों को दूसरे राज्य के वाहन चालकों की तुलना में प्रति लीटर 10-15 रुपये अधिक चुकाने पड़ सकते हैं.