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AAP सांसद संजय सिंह ने रविवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक लेटर भेजा। इसमें उन्होंने उन 7 सांसदों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया है, जिन्होंने बीच रास्ते में आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। उन पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। सांसदों के खिलाफ AAP कानूनी कार्रवाई भी करेगी, क्योंकि दल बदलना विश्वासघात करना भी है।
संदीप पाठक का जाना बड़ा झटका

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AAP सूत्रों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक के जाने से लगा है। क्योंकि वे अरविंद केजरीवाल के सबसे वफादार लोगों में शामिल थे। केजरीवाल को भरोसा था कि वह उनका साथ नहीं छोड़ेंगे, लेकिन यह सोच उनकी गलतफहमी निकली। हालांकि इस बारे में ऑफिशियली केजरीवाल ने कुछ नहीं कहा, लेकिन संदीप पाठक का जाना उनके और पार्टी के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।
नीतियों से असंतुष्ट थे संदीप पाठक

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AAP सूत्रों के अनुसार, संदीप पाठक काफी समय से पार्टी की नीतियों से असंतुष्ट थे। खासकर दिल्ली चुनाव में हार के बाद संदीप पाठक धीरे-धीरे हाशिए पर आ गए थे। राघव की तरह संदीप ने भी पार्टी की गतिविधियों से दूरी बना ली थी। लेकिन केजरीवाल उन्हें वफादार समझते थे, पर वे दगाबाज निकले। इसलिए संदीप पाठक के जाने से केजरीवाल निराश हैं। हालांकि उन्होंने बात करने की कोशिश भी की थी, लेकिन बातचीत से पहले फैसला ले लिया गया।
केजरीवाल ने की थी सांसदों से बात

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अरविंद केजरीवाल को सांसदों की निराशा की भनक लग गई थी। उन्होंने 22 अप्रैल को सांसदों से मुलाकात भी की थी और कहा कि अगर वे खुश नहीं हैं तो इस्तीफा दे दें। उन्हें फिर से टिकट देकर नई सीट से चुनावी रण में उतारा जाएगा, लेकिन दूसरे दौर की बातचीत से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने विक्रमजीत साहनी, अशोक मित्तल और संदीप पाठक से मुलाकात भी की थी। मुंबई में हरभजन सिंह से भी संपर्क किया था।
विक्रम साहनी से पूछा था एक सवाल

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को विक्रम साहनी से मीटिंग के समय केजरीवाल ने उनसे सवाल पूछा था कि क्या उन्हें BJP जॉइन करने के लिए फोन आया है? केजरीवाल ने उसी दिन संदीप पाठक से भी मुलाकात की थी और दोनों करीब डेढ़ घंटा साथ रहे। AAP से इस्तीफा देने से पहले भी केजरीवाल ने साहनी को फोन किया था और मिलने के लिए बुलाया था। वे तो आए नहीं, लेकिन उनका इस्तीफा आ गया।